हिमाचल में जारी ओलावृष्टि और तूफान से प्रदेश में वीरवार को लगातार दूसरे दिन भी भारी तबाही हुई है। चंबा जिला के डलहौजी में तूफान के चलते आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पर गेट गिरने से उसकी मौत हो गई। बुधवार को तूफान और आसमानी बिजली गिरने से तीन लोगों की मौत हुई थी। जिला ऊना के हरोली में अस्पताल का मेन गेट गिरने से फार्मासिस्ट की कार क्षतिग्रस्त हो गई। तूफान के चलते प्रदेश के कई घरों और स्कूलों की छतें उड़ गई हैं। कई जगह पेड़ गिरने से सड़कें बंद हो गई हैं। अपर शिमला और कुल्लू में ओलावृष्टि से सेब की फसल को भारी नुकसान हुआ है।
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कुल्लू जिला के मणिकर्ण की रसोल घाटी में लापता पांचों ट्रैकर मिल गए हैं। इनमें दो की हालत नाजुक बताई जा रही है। तूफान और बारिश के चलते राजधानी शिमला सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों में बिजली सप्लाई प्रभावित हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने प्रदेश में शुक्रवार को भी बारिश और बर्फबारी होने का पूर्वानुमान जताया है। चंबा जिला में बारिश और तूफान से भारी नुकसान हुआ है। चंबा-तीसा, चंबा-भरमौर समेत अन्य मुख्य मार्गों पर भूस्खलन और पेड़ गिरने से आवाजाही बाधित हुई है।
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सलूणी और तीसा में एक दर्जन सरकारी स्कूलों व घरों की छत तेज तूफान चलने से क्षतिग्रस्त होकर जमीन पर गिर गई। एक स्कूली बच्चे के पैर की अंगुली भी इस दौरान कट गई। भरमौर व होली के क्षेत्रों में बारिश के साथ ओलावृष्टि भी हुई है। इससे सेब की फसल को नुकसान पहुंचा है। मंडी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बुधवार रात हुई मूसलाधार बारिश और तूफान से गेहूं, मटर की फसल सहित आम व लीची की फ्लावरिंग को नुकसान पहुंचा है।
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धर्मपुर, सुंदरनगर क्षेत्र में आम लीची की फ्लावरिंग को नुकसान पहुंचा है। सरकाघाट में गेहूं, मटर की फसल भी प्रभावित हुई है। बिलासपुर जिला में भी तूफान के चलते स्वारघाट में नकदी फसलों को नुकसान पहुंचा हैं। कुल्लू जिला की सैंज घाटी में तूफान ने कहर बरपाया है। सैंज घाटी के बनाउगी में देवता कशु नारायण मंदिर की छत तूफान की जद में आने से तबाह हो गई।
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घाटी में कई मकानों की छतें भी उड़ी हैं। जिला में टमाटर, गोभी, गेहूं और मटर की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। गाड़ापारली पंचायत में देवता थान के भंडार में आसमानी बिजली गिरने से 80 हजार का नुकसान हुआ है। किन्नौर जिला के काफनू-वांगतू, पूह, काजा और छितकुल की ओर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है।
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कुल्लू जिले के निरमंड खंड की कई पंचायतों में बुधवार को हुई ओलावृष्टि से बागवानों को खासा नुकसान पहुंचा है। कांगड़ा जिला में दो दिन से चल रहे तूफान से जिले के कई हिस्सों में नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है। जिला सोलन में कुछ जगह घरों की छत्तों को नुकसान पहुंचा है। कई जगह पेड़ गिर गए हैं।
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ऊना जिला में पेड़ों के गिरने के कारण कई क्षेत्रों में वीरवार को दिन भर बिजली गुल रही। तूफान के चलते जिले के हरोली, बंगाणा, ऊना और अंब उपमंडलों के दर्जनों गांवों में बिजली सप्लाई ठप रही। हमीरपुर जिला में भी तूफान के चलते बिजली सप्लाई बाधित रही। रोहतांग दर्रा में 30 सेंटीमीटर, मढ़ी में 20, कोकसर में 15 सेंटीमीटर ताजा बर्फबारी रिकॉर्ड की गई।
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जनजातीय जिला किन्नौर के सीमांत क्षेत्र के छितकुल में तीन फीट बर्फबारी के कारण यहां कोलकाता से पहुंचा पर्यटकों का दल फंस गया है। हालांकि स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग बाधित मार्ग को बहाल करने में जुटा हुआ है। बहरहाल पर्यटकों ने छितकुल के होटलों और स्थानीय लोगों के घरों में आश्रय ले रखा है।
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सभी पर्यटक खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक बुधवार को हुई बर्फबारी से जहां किन्नौर जिले के कई रूट प्रभावित हो गए हैं, वहीं सीमा से सटे गांव छितकुल की प्राकृतिक सुंदरता को निहारने कोलकाता से पहुंचा पर्यटकों का दल बर्फबारी के कारण यहां फंस गया है। छितकुल में तीन फीट बर्फबारी होने के कारण बिजली और यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है।
पर्यटकों को ठहरने के लिए होटलों और स्थानीय लोगों के घरों में शरण दी गई है। छितकुल के पूर्व प्रधान मुकेश नेगी ने बताया कि छितकुल में भारी बर्फबारी के कारण 100 पर्यटक फंस गए हैं। होटल और ग्रामीणों की मदद से उनको सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है। जिला पर्यटन अधिकारी एवं एसडीएम कल्पा डॉ. अवनिंदर कुमार शर्मा का कहना है कि लोक निर्माण विभाग की मशीनें और मजदूर बर्फ को हटाने में जुटे हुए हैं।