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जानना नहीं चाहेंगे, इतने दिन किस हाल में रहे रघुनाथ जी

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ये लोगों की आस्था ही थी कि दिसंबर में चोरी हुए भगवान रघुनाथ आखिरकार मिल गए। आइए हम बताते हैं कि भगवान रघुनाथ कहां, किस हाल में रहे।
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आठ दिसंबर की रात मास्टरमाइंड नेपाली युवक अपने साथियों के साथ मंदिर के छत का स्लेट उखाड़कर मंदिर में घुसा था। मंदिर से यह भगवान रघुनाथ समेत कई देवताओं की मूर्तियां चुरा ले गया था।
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बताया जा रहा है कि भगवान रघुनाथ इसी पालकीनुमा आसन पर विराजमान होते थे। मगर ये खाली हो गया था।

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अलमारी के भीतर से भी कई मूर्तियां चोरी की गई थी।
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ये भगवान की शक्ति ही थी कि आरोपी इसे जिले से बाहर तक नहीं ले जा पाया। यह इन मूर्तियों को दो जगह दफनाकर नेपाल भाग गया। इंतजार कर रहा था कि पुलिस का पहरा हटते ही इन्हें बेच देगा।
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उधर, चोरी का पता चलते ही हिमाचल के लोगों पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। मगर देवताओं की भविष्यवाणी से इन्हें बड़ी आस थी।
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चोरी की इस वारदात से देवता के मुख्य कारदार विधायक महेश्वर सिंह सबसे ज्यादा दुखी थे। मगर हिम्मत हारने की बजाए उन्होंने पुलिस को जांच में तेजी लाने को कहा।

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उम्मीद न हारते हुए लोगों ने रघुनाथ की पूजा अर्चना शुरू कर दी। कई दिन तक अनुष्ठान होता रहा।

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धीरे धीरे पुलिस जांच आगे बढ़ रही थी। सीसीटीवी से पुलिस को एक नेपाली मंदिर परिसर में दिखाई दिया। मोबाइल लोकेशन में भी इसका पता चला कि ये काफी देर तक मंदिर में रहा और कई कॉल किए।

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पुलिस के हाथ इसका फोन नंबर लग गया था। इसका नाम नरबहादुर थ। आरोपी ने नेपाल भी फोन किया था। पता चला कि नर बहादुर नेपाल निकल गया है। उसके मोबाइल की लोकेशन भी नेपाल बताई जा रही थी। इंटरपोल की मदद से चोर नेपाल में उसके घर से दबोच लिया।

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आरोपी ने बताया कि वह मूर्तियां लेकर जिले से बाहर निकलने की फिराक में था लेकिन बजौरा के पास पुलिस नाका होने के कारण आरोपी ने बजौरा के पास हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनी के पास ही मूर्तियां दबा दीं। आरोपी जल्दबाजी में ज्यादा गहरा गड्ढा नहीं खोद पाया था।

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बजौरा में भगवान रघुनाथ, हनुमान और गणेश जी की मूर्तियां मिलीं। सभी जमीन में दफन थे लेकिन ये देवताओं की शक्ति ही थी कि सभी सुरक्षित थे और किसी और के हाथ भी नहीं लगे। खुदाई में भी आसानी से मिल गए।

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पुलिस ने कुल्‍लू मे बाकी दफनाई गई शालिग्राम, नरसिंह के अलावा चांदी की चरण पादुकाएं, चांदी का लोटा, चांदी का पीहडू़ समेत पूजा की अन्य सामग्री बरामद की है।

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बसंत पंचमी से पहले वापस मिले भगवान रघुनाथ जिले में रहकर लोगों के साथ जुड़े हुए थे। यही कारण था कि दूसरे देवताओं ने जो भविष्यवाणी की थी वो भी सच साबित हुई।

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बताया जा रहा है कि भगवान रघुनाथ की इन मूर्तियों की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत अरबों में हैं।
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बसंत पंचमी पर करीब 400 साल से चली आ रही भगवान रघुनाथ रथ यात्रा की परंपरा नहीं टूटी। सवा महीने पहले चोरी हुई मूर्ति के बाद लोग मायूस थे कि इस बार बिना रथ्‍ा यात्रा के बसंत पंचमी होगी। लेकिन एक दिन पूर्व भगवान रघुनाथ की मूर्ति मिलने को लोग चमत्कार मान रहे हैं।
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