पेट्रोलियम पदार्थों पर जीएसटी प्रभावी न कर सरकार ने राज्यों का खजाना भरने का रास्ता खुला रखा। अगर इन पर GST लगता तो आपकी बल्ले-बल्ले हो जाती।
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पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस को जीसीटी के मौजूदा चार स्लैब में लाते ही दाम आधे हो जाएंगे। जीएसटी में 5, 12, 18 और अधिकतम 28 प्रतिशत की दर है, जबकि पेट्रोलियम पदार्थों पर केंद्र और राज्य के करों को जोड़कर 150 प्रतिशत तक टैक्स लगाया जा रहा है।
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अगर सरकार जीएसटी के तहत पेट्रोल-डीजल को लाए तो आधे दाम ही देने पड़ेंगे। हिमाचल को पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से पांच सौ करोड़ से अधिक का राजस्व मिल रहा है।
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राज्य सरकार पेट्रोल पर 25 प्रतिशत वैट वसूल रही थी। इसे जीएसटी आने के बाद प्रभावी बनाया जाएगा। पेट्रोल के प्रति लीटर अंतरराष्ट्रीय बाजार में मौजूदा दाम देश में आयात के बाद लगभग 28 रुपये हैं।
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ऑयल कंपनी लगभग तीन रुपये प्रति लीटर पेट्रोल की ऑपरेशनल और मार्केटिंग खर्च पर व्यय करती है। सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, चुंगी, डीलर कमीशन, ट्रांसपोर्ट, स्टेट वैट को मिलाकर लगभग 150 प्रतिशत कर प्रति लीटर लगते हैं।
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केंद्र और राज्यों के करों को समाप्त कर अगर पेट्रोल की बिक्री को जीएसटी की अधिकतम 28 प्रतिशत की परिधि में लाया जाता है तो दाम आधे रह जाएंगे।
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प्रदेश के कुल राजस्व का 20 प्रतिशत शराब की बिक्री से प्राप्त होता है। जीएसटी से शराब को बाहर रखने से राज्यों सरकारों के हितों को केंद्र ने सुनिश्चित किया है। केंद्र ने शराब को जीएसटी से बाहर रखा, लेकिन उसके कच्चे माल उसकी परिधि में आता है। ऐसे में जीएसटी से बाहर रहकर भी शराब उत्पादन मंहगा होगा, लेकिन उसे बार रेस्टोरेंट में परोसना सस्ता हो गया है।
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शराब पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी और वैट सहित आधा दर्जन कर और शुल्क लगते हैं। एक बोतल पर लगभग सवा सौ प्रतिशत तक के करों से बाजार में पहुंचते उसके दाम उत्पादन लागत से तीन गुना तक पहुंच जाते हैं। बीयर के लिए इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल एक्साइज ड्यूटी, सेल्स टैक्स और वैट लगता था, जिसकी दरें 12 से 15 प्रतिशत के भीतर थीं।
अब जीएसटी में बीयर उत्पादन में होने वाले अधिकांश कच्चे माल को 18 प्रतिशत दर से रखा है। ऐसे में उत्पादन लागत बढ़ेगी। हालांकि, शराब को परोसने वाले बॉर को सर्विस चार्ज से राहत मिली है, लेकिन ठेकों पर बिक्री में कोई खास अंतर नहीं आएगा। जीएसटी से शराब को बाहर रखने से राज्य सरकार की मनमानी नीति उसकी बिक्री पर लागू रहेगी। भारी राजस्व नुकसान के चलते जीएसटी में शराब बिक्री शामिल होने के कोई संभावना नहीं है।