दुनिया की सबसे मुश्किल यात्राओं में से एक श्रीखंड महादेव में पार्वती मां की तपोस्थली पार्वती बाग अपनी दुर्लभता के लिए जाना जाता है। देखिए तस्वीरें और जानिए रहस्य..
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तस्वीरें: मां पार्वती का बाग, दुर्लभ फूलों की घाटी
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हिमाचल के कुल्लू जिला में स्थित पांच कैलाशों में से एक श्रीखंड महादेव यात्रा के दौरान समुद्र तल से करीब 13,700 फुट की ऊंचाई पर स्थित पार्वती बाग को देखकर हर कोई मंत्र मुग्ध हो जाता है। मगर मां पार्वती की इस फूलों में घाटी में कई दुर्लभ जड़ी बूटियां पाई जाती है।
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पार्वती बाग श्रीखंड महादेव झरना और पार्वती झरने के बीच एक सुंदर घाटी है। मान्यता की यहां पर कई दुर्लभ जड़ी बूटियां हैं। इसमें ब्रह्म कमल सहित ऐसी बूटियां है जिन्हें छूकर भी आप प्रभावित हो सकते हैं। जड़ी बूटियों की खुशबू यहां चारों ओर फैली रहती है और यहां ज्यादा देर रूकने से कई श्रद्धालु बेहोश तक हो जाते हैं।
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स्थानीय लोगों के मुताबिक यहां पर संजीवनी बूटी भी पाई जाती है। मगर वर्तमान में अब लोगों को उसकी पहचान ही नही हैं। इसके अतिरिक्त यहां कई प्रकार की जीवनदायनी और अदभुत जड़ी बूटियों का खजाना भी है। श्रीखंड महादेव की कठिन यात्रा के दौरान यहां आखिरी पड़ाव है।
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पौराणिक कथा के अनुसार श्रीखंड कैलाश पर्वत पर शिव भगवान ने भस्मासुर नामक राक्षस का वध किया था।
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भीम डवार से पार्वती बाग पहुंचने के दौरान श्रद्धालुओं को पार्वती बाग से बहने वाला यह झरना भी काफी आकर्षित करता है।
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शिवजी ने यहां पर ही मोहिनी रूप धारण करके शिवजी के भस्म करने वाले कंगन को भस्मासुर के ऊपर घुमाया और उसे भस्म कर दिया था।
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श्रीखंड यात्रा हर वर्ष जुलाई माह में शुरू होती है। राजधानी शिमला पहुंचने के बाद श्रद्धालु पहले बस या वाहन से रामपुर और इसके बाद कुल्लू के जाओं गांव पहुंच सकते हैं। यहां पर करीब 35 किलोमीटर की दुर्गम पैदल यात्रा शुरू होती है।
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करीब दो दिनों की पैदल यात्रा के बाद श्रद्धालु पार्वती बाग के बाद नैन सरोवर और फिर करीब 17 हजार फुट ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव की शिला के दर्शन करते हैं। यहां पर कार्तिकेय पर्वत के दर्शन भी होते हैं।