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अब हवा की नमी से तैयार हो सकेगा पीने का पानी, जानिए कैसे

Tue, 19 Feb 2019 04:54 PM IST
ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी
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अब हवा की नमी से भी पीने का स्वच्छ पानी तैयार होगा। आईआईटी मंडी में हवा से जल बनाने की तकनीक विकसित करने का दावा किया गया है। सौर ऊर्जा से पानी शुद्ध करने की तकनीक पर राष्ट्रीय हिमालय अध्ययन मिशन की वर्कशॉप में शोधकर्ताओं ने कन्वेशनल सोलर स्टिल्स और हाइड्रोपैनल जैसे उपकरण प्रदर्शित किए।
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ये डिवाइस हवा की नमी को पानी में बदलने में सक्षम हैं। यदि वैज्ञानिकों का यह शोध रंग लाया तो मानव जगत की सबसे बड़ी पानी की समस्या का निदान होगा। 
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वैश्विक स्तर पर स्वच्छ पीने के पानी की किल्लत बड़ी समस्या के रूप में उभर रही है। जमीन में पानी का स्तर दिनोंदिन गिरता जा रहा है। कई स्थानों पर तो भूजल के दोहन पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है।

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 ऐसे में अगर हवा की नमी से पीने का पानी बन सके तो पेयजल किल्ल्त से जूझ रहे करोड़ों लोगों के लिए राहत की बात होगी। कार्यशाला में बताया गया कि इस तकनीक में अधिक नमी वाली हवा के तापमान को कम किया जाता है। 
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इससे हवा में मौजूद जल के अणु नीचे गिरने लगते हैं और इन्हें एकत्रित किया जाता है। हवा के इस तंत्र में से गुजारने पर डिवाइस हवा में मौजूद आर्द्रता को कम करने का काम करता है और जल को एक विशेष टैंक में एकत्रित कर लिया जाता है। 
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बाद में इस जल को एक बड़े फिल्टरेशन तंत्र से गुजारा जाता है, जिसके कारण इसमें होने वाली संभावित सूक्ष्मजैव या रसायन संबंधी अशुद्धियां अलग हो जाती हैं। 
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वर्कशॉप में पेयजल की वस्तुस्थिति, कचरा जल उपचार, पानी से पैदा होने वाली बीमारियां, पानी शुद्ध करने के साधन और भारत में उनके बाजार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कई निजी कंपनी ने हवा की नमी से पानी बनाने वाली मशीन लांच की है।

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शुरुआती तौर पर व्यावसायिक उपयोग के लिए 500 लीटर और 1000 लीटर क्षमता की मशीनें लांच की गई हैं। 1000 लीटर पानी बनाने वाली मशीन की कीमत करीब साढ़े नौ लाख रुपये तक बताई जा रही है। 
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एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटिंग एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग डॉ. भरत एस राजपुरोहित और असिस्टेंट प्रो इंजीनियरिंग विभाग आईआईटी मंडी और वर्कशॉप की कोआर्डिनेटर ने कहा कि आईआईटी में इस तकनीक पर सफलतापूवर्कक काम किया जा रहा है। 
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