शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में शुक्रवार को बॉलीवुड अभिनेता एवं मशहूर रंगकर्मी नसीरू द्दीन शाह ने अपने नाटक ‘इस्मत आपा के नाम’ का मंचन किया।
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जवानी में कभ्ाी भ्ाी नहीं कर पाता ‘डेढ़ इश्किया’
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इस प्रोजेक्ट के तहत रवीन्द्रनाथ टैगोर की विक्टोरिया कैम्पो की मुलाकात पर आधारित फिल्म बनाई जाएगी।
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उनकी पत्नी रत्ना पाठक शाह उनके साथ थीं। नसीरूद्दीन शाह बोले, वह इससे पहले केवल एक बार 1974 में शिमला आए थे। आज 40 साल बाद आया तो शिमला को बहुत कम बदला पाया है।
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नौजवानों के मिजाज की फिल्में 63 साल की उम्र में करने के सवाल पर नसीरूद्दीन बोले कि उनसे ‘डेढ़ इश्किया’ फिल्म कभी भी जवानी में नहीं हो पाती। हर चीज का एक वक्त होता है।
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शाह का कहना है कि जब शरीर नहीं रहेगा तो भी उनकी आत्मा थियेटर में ही मंडराती रहेगी।
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नसीरूद्दीन शाह ने कहा कि कई हिल स्टेशन विकास की अंधी दौड़ में बर्बाद हुए हैं, मगर शिमला को जिस तरह से प्रिजर्व कर रखा गया है, वह अच्छा है।
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फिल्मी सितारों का थियेटर से वास्ता न होने को लेकर नसीरूद्दीन शाह ने कहा कि फिल्मों और थियेटर का एक-दूसरे से ज्यादा लेना-देना नहीं। दोनों एकदम अलग विधाएं हैं।
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शिमला के युवा रंगकर्मी आपसे क्या उम्मीद करें? इस सवाल के जवाब में नसीरूद्दीन शाह ने कहा कि वह शिमला में एकेडमी तो नहीं खोलेंगे, मगर अब शिमला आते-जाते रहेंगे। यहां के रंगकर्मियों के लिए जो कर पाएंगे, वह करेंगे।