हिमाचल की ब्यास नदी में एक मछुआरे को रहस्यमयी पत्थर मिला है। 10 किलो वजनी इस पत्थर का चमत्कार देख लोग इसकी पूजा के लिए उमड़ने लगे हैं। उतर भारत में इस तरह का पत्थर मिलने का यह पहला मामला बताया जा रहा है। यह पत्थर एक मछुआरे को मिला है।
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जानकारी के अनुसार यह मछुआरा हमीरपुर के देहरा में सोमवार शाम ब्यास नदी में मछलियां पकड़ रहा था। इसके लिए यह बार बार जाल बिछा रहा था। अचानक इसी दौरान उसे नदी में कुछ तैरता दिखा।
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पानी में तैर रहे इस पत्थर को देखकर पहले तो मछुआरा रमेश चंद घबरा गया। लेकिन फिर हिम्मत जुटाकर पत्थर के पास गया और इसे पकड़ लिया। यह करीब 10 किलो भारी था।
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इसके बाद उसने दोबारा पत्थर को नदी में फेंका, लेकिन पत्थर डूबा नहीं। रमेश चंद पत्थर को घर ले आया और पूजा स्थल में पानी में रखकर इसकी पूजा-अर्चना की। जैसे ही लोगों को इसका पता लगा तो रमेश के घर लोगों का तांता लग गया।
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लोगों के सामने भी रमेश ने इस पत्थर को पानी से भरी बाल्टी में रखा है लेकिन यह नहीं डूब रहा है। अब सैकड़ों लोग पत्थर की पूजा-अर्चना पहुंच गए हैं। मान्यता है कि इस तरह के पत्थर दक्षिण भारतीय समुद्र तट रामेश्वरम और श्रीलंका के बीच समुद्र में पाए जाते हैं।
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त्रेता काल में रामायण में भी ऐसे ही पत्थरों से रामसेतु के निर्माण का जिक्र है। उधर, रमेश चंद का कहना है कि उसने कई बार पत्थर को पानी में डुबोया, लेकिन वह डूबा नहीं। उसने पत्थर को पूजा-अर्चना के लिए घर में रखा हुआ है।
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उधर, डिग्री कॉलेज धर्मशाला के जियोलॉजी विभाग के एचओडी प्रोफेसर डॉ. सुनील धर का कहना है कि अगर पत्थर में बहुत ज्यादा छेद हों तो उसमें हवा चली जाती है। इस वजह से भी पत्थर तैरता है। पूरे विश्व में स्कोरिया नाम का पत्थर ही है जो तैरता है। ब्यास नदी में मिलने वाले पत्थर की जांच की जानी चाहिए। उसके बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इसके पीछे क्या कारण है।
वहीं पर्यावरण, विज्ञान एवं तकनीक विभाग के मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी कुनाल सत्यार्थी का कहना है कि अगर ऐसा पत्थर कहीं चर्चा में आया है तो इसकी जांच कराई जाएगी। यह देखा जाएगा कि उसके तैरने का क्या कारण है।