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शहीद हवलदार जोराबर की बेटी ने पीएम मोदी से मांगा इंसाफ, रखी ये मांग

Sat, 24 Mar 2018 12:38 PM IST
सुनील धीमान, अमर उजाला, शाहपुर (कांगड़ा)
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आतंकियों से मुठभेड़ में देश पर कुर्बान हुए हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के शहीद हवलदार जोराबर सिंह के बच्चों के हौसले भी देश प्रेम से ओतप्रोत हैं। शहीद की बड़ी बेटी हरीतिका (12) ने कहा कि उनके पिता ने देश की रक्षा की खातिर प्राण दिए हैं। इस बात का उसे गर्व हैं। 
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बड़े भाई के बच्चों की शादी का लिया था जिम्मा- आंसुओं के साथ भारी मन से हरीतिका ने कहा कि पाकिस्तान अच्छा देश नहीं है। मोदी सरकार को पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब देकर उनके पिता की शहादत का बदला लेना चहिए। कुछ साल पहले बड़े भाई की मौत के बाद हवलदार जोराबर सिंह ने उनकी दो बेटियों और एक बेटे के विवाह करवाने की जिम्मेवारी ली थी जो अभी तक पूरी नहीं हुई थी। साल 2019 में जोराबर सिंह सेना से सेवानिवृत्त होने वाले थे। सेवानिवृत्ति पर ही जोराबर सिंह ने परिवार के साथ नए घर में प्रवेश करना था। नए मकान की प्रतिष्ठा और सेवानिवृत्ति की खुशी एक साथ मनाने का जोराबर का इरादा था। 
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पिता ने सेना के मेडल पहनकर दी बेटे को सलामी- शहीद के पिता सूबेदार राय सिंह ने सीने पर सेना के मेडल और सिर पर हिमाचली टोपी पहनकर अपने शहीद बेटे को सलामी दी। शहीद के पिता सभी से यही कहते हुए दिखे कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर फक्र है। बुजुर्ग माता-पिता के बुढ़ापे की जिम्मेवारी शहीद के कंधों पर थी। शहीद का छोटा भाई गांव में ही दिहाड़ी-मजदूरी करता है।

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बेटियों को भेजना चाहते थे पढ़ाई के लिए विदेश- शहीद की छोटी बेटी कृतिका (10) ने कहा कि छोटे भाई को सैनिक स्कूल में दाखिल करवाने का पिता का सपना था। बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेजना चाहते थे।
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जोराबर सिंह अमर रहे... पाकिस्तान मुर्दाबाद... के नारों से शहीद को विदाई- कश्मीर के कुपवाड़ा के हलमतपुरा में आतंकी मुठभेड़ में शहीद हुए रैत ब्लॉक के हवलदार जोराबर सिंह को हजारों नम आंखों ने विदाई दी। शहीद जोराबर सिंह अमर रहे...पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लोगों ने लगाए। सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ तिरंगे में लिपटी शहीद की पार्थिव देह को अंतिम सलामी दी गई।
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पैतृक गांव में सेना के जवानों ने सुबह करीब 10 बजे शहीद जोराबर के पार्थिव शरीर को ताबूत में अंतिम दर्शनों के लिए रखा। शहीद की पत्नी रंजना को सबसे पहले इनका चेहरा दिखाया गया। पिता सूबेदार राय सिंह, माता शकुंतला देवी, बेटियां हरीतिका, कृतिका और बेटे रुद्रांश सहित लोगों ने शहीद के अंतिम दर्शन किए।
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शहीद के घर से लेकर शमशानघाट तक एनएच को करीब आधे घंटा तक बंद रखा गया। करीब 11 बजे शहीद की अंतिम यात्रा शमशानघाट पहुंची। वहां पर पहले शहीद के पिता, पत्नी और मां ने पोते के साथ पुष्पांजलि अर्पित की।
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सेना की ओर ब्रिगेडियर नवदीप बराड़, प्रदेश सरकार की ओर से शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी, जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम शाहपुर जगन ठाकुर और पूर्व वन निगम उपाध्यक्ष केवल सिंह पठानिया ने भी शहीद को पुष्पांजलि अर्पित की। सेना के जवानों ने हवा में फायरिंग कर सलामी दी। करीब साढ़े 11 बजे शहीद के बेटे रूद्रांश ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।
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