राष्ट्र स्तरीय शरदोत्सव के दूसरे दिन मनाली के मालरोड पर सैकड़ों महिलाओं ने एकसाथ पारंपरिक परिधानों में कुल्लवी नाटी डाली। तस्वीरें: अजय कुमार
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नाटी के माध्यम से बेटियां और कुल्लू की पुरातन संस्कृति को बचाने का संदेश दिया गया।
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प्राचीन कुल्लवी परिधानों में डाली गई महिलाओं की नाटी सैलानियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गई।
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वे अपने मोबाइल और कैमरों में वीडियो बनाते रहे। बुधवार को मनाली के मालरोड पर ब्यास नदी के दाएं तट मार्ग पर करीब 30 महिला मंडलों की 300 महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सामूहिक नाटी डाली।
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सुबह दस बजे से महिलाएं मनाली पहुंचना शुरू हो गई थीं।
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प्राचीन कुल्लवी थिपू, चंद्रहार, चांपकली, त्रमणियां, चांदी की चूड़ियां, बाजू बंद, बूमणी, पायल, पट्टू पहनकर सैकड़ों महिलाओं ने ढोल और करनाल बजते ही रुमाल हवा में लहराना शुरू दिया।
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करीब एक घंटे तक नाटी डालकर महिलाओं ने कुल्लू की प्राचीन संस्कृति और बेटियों के संरक्षण का संदेश दिया।
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नाटी के बोल बदलते ही नाटी का स्टाइल भी बदलता रहा।
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इसे देखने के लिए स्थानीय लोगों और सैलानियों की भीड़ उमड़ी।
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आधी नाटी में एक पूरे घेरे को तोड़ कर महिलाओं ने एक साथ छोटे-छोटे गोले बना दिए।
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अलग-अलग गोले में नाटी डालकर महिलाओं ने खूब रंग जमाया।
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इस दौरान एसडीएम मनाली एचआर बेरवा, शलीण पंचायत प्रधान मोनिका ठाकुर, ग्राम पंचायत मनाली की प्रधान मोनिका भारद्वाज