भारत में एक गांव ऐसा भी है जहां आज भी महान सिकंदर के वंशज जिंदा है। भारतीय शासक पोरस को हराने के बाद से ये लोग इसी गांव में बसे हुए हैं। यहां का अपना ही कानून है जो इतना सख्त है कि लोग इस गांव में जाने तक से डरते हैं।
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ऐतिहासिक गांव, यहां आज भी जिंदा है सिकंदर के वंशज
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यह गांव हिमाचल के जिला कुल्लू की वादियों में बस मलाणा है। महान शासक सिकंदर अपनी फौज के साथ खुद यहां आया था। भारत के कई क्षेत्रों पर जीत हासिल करने और राजा पोरस को हराने के बाद सिंकदर के कई वफादार सैनिक जख्मी हो गए थे।
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सिकंदर खुद भी बहुत थक गया था और वह घर वापस जाना चाहता था। ब्यास तट के बाद जब सिकंदर इस गांव में पहुंचा तो यहां का शांत वातावरण उसे बेहद पसंद आया। वह काफी दिन तक यहां ठहरा। कहा जाता है कि बाद में कुछ यौद्घा और सैनिक ऐसे थे जो वापस नहीं जा सकते थे। सिकंदर ने उन्हें यही रुकने को कह दिया।
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सिकंदर के भारत छोड़ने के बाद ये लोग यहीं पर बस गए थे। इन्होंने यहां अपने परिवार बना लिए और वंश को आगे बढ़ाया। उसके बाद से ये गांव अपनी अलग पहचान बनाने लगा।
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एचपी यूनिवर्सिटी समेत बाकी सस्थाओं की ओर से किए गए ताजा शोध के बाद ये कहानी पुख्ता भी हो गई। यहां के लोगों की भाषा, उनका खानपान व शारीरिक लक्ष्ण काफी हद तक ग्रीस के लोगों से मिलता जुलता पाया गया।
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गांव का कानून इतना सख्त है कि बाहरी लोगों को गांव के बनाए गए एक खास रास्ते पर ही चलना पड़ता है। किसी की दीवार, खेत, पेड़ या घर को छूने तक का यहां जुर्माना या बलि देनी पड़ती है।
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यदि कोई अपराध करता है तो सजा कानून नहीं बल्कि जामलू देवता देते हैं। देवता गुर या देवता के द्वारा चयनित सदस्य देते हैं। भारत का कोई भी कानून या पुलिसिया राज नहीं चलता।