हिमाचल के गुम्मा बस हादसे के पीछे का चौंकाने वाला सच सामने आ गया है। मौके पर मौजूद लोगों और हादसे में बचे युवक ने जब असली वजह का खुलासा किया तो हर कोई आक्रोश से भर गया। आइए जानते हैं-
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उत्तराखंड की सीमा के साथ नेरवा तहसील के गुम्मा इलाके के नजदीक हुए भीषण बस हादसे में 45 लोगों की जानें चली गई। बस बेकाबू होकर 800 मीटर गहरी खाई में लुढ़क गई। टौंस नदी के तट पर गिरी बस के परखच्चे उड़ गए। पहले सभी हादसे की वजह खराब सड़क या ओवरलोडिंग मान रहे थे लेकिन वजह कुछ और थी।
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अब तक की जांच में सामने आया है कि उत्तराखंड की यह प्राइवेट बस पहले से ही खराब थी। तकनीकी खराबी के बावजूद इसे चलाया जा रहा था। मौके पर पहुंचे लोगों ने बताया कि बस को मिनस पुल के पास चालक ने मकैनिक के पास भी खड़ा कर दिया था।
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मगर वहां पर परिचालक ने बस की टूटी कमानी को तार से बांध कर चालक को धीरे-धीरे चलने के लिए मजबूर किया। बस हादसे का शिकार हो सकती है ये जानते हुए भी परिचालक सवारियों के लालच में इसे पीछे से आ रही दूसरी बस के आगे ही चलाता रहा। आगे जानिए कैसे हुआ हादसा-
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बताया जा रहा है कि बस में काफी लोग खड़े भी थे। वहीं परिचालक बार बार बस को चैक भी रहा था कि खराबी बढ़ तो नहीं गई। तभी सामने से आ रहे वाहन को क्रासिंग के लिए जगह देते समय बस खाई में एक तरफ को झुक गई और टौंस नदी में गिर गई।
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लोगों ने बताया कि इस बस के पीछे भी एक प्राईवेट बस चल रही थी। बस खराब होने के बावजूद तेज रफ्तार में भी थी जिससे हादसा हो गया। वहीं हादसे के वक्त परिचालक और एक अन्य युवक खिड़की से बाहर सड़क पर गिर गए। इससे इन दोनों की जान बच गई जबकि बाकी सब हादसे का शिकार हो गए।
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रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कुछ शव खाई की ढलान पर झाडि़यों से निकाले गए। कई शव क्षत-विक्षत हालत में नदी किनारे बिखरे पड़े थे। मृतकों के शवों से रिसे खून से नदी के तट का पानी भी लाल हो गया।
हादसे में 44 लोगों के शव मौके पर मिले हैं। कुछ लोगों के नदी में बहने की आशंका भी जताई जा रही है। शाम चार बचे तक बीस शवों की ही पहचान हो सकी थी। एसडीएम चौपाल अनिल चौहान ने बताया कि 45 लोगों के शव मौके पर मिले हैं।