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पहले ही लिखी जा चुकी थी अनिल के इस्तीफे की पटकथा, जानिए कैसे

Sat, 13 Apr 2019 10:03 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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अनिल शर्मा - फोटो : फाइल फोटो
मंडी संसदीय सीट से आश्रय शर्मा को कांग्रेस का टिकट मिलने के साथ ही अनिल शर्मा के मंत्री पद छोड़ने की पटकथा लिख दी गई थी। सूत्रों के अनुसार बेटे अनिल शर्मा के मंत्री पद छोड़ने की शर्त पर ही कांग्रेस हाईकमान ने पूर्व संचार मंत्री पंडित सुखराम के पोते आश्रय शर्मा को टिकट दिया था। इस पटकथा को अंजाम तक पहुंचाने के लिए ही कांग्रेस नेता बीते कुछ दिनों से अनिल शर्मा के पक्ष में खुलकर बयानबाजी करते नजर आए। उधर, इस्तीफे के राजनीतिक नफा-नुकसान से बचने को अनिल शर्मा और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पहले आप, पहले आप की नीति पर चल रहे थे।
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अनिल शर्मा - फोटो : फाइल फोटो
विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल होकर सुखराम परिवार ने मंडी में कांग्रेस की परेशानियां बढ़ा दी थीं। मंडी सदर से चुनाव लड़ते हुए अनिल शर्मा ने कांग्रेस नेता कौल सिंह ठाकुर की बेटी चंपा ठाकुर को हराया। भाजपा सरकार बनने के बाद अनिल शर्मा को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। कई सालों तक कांग्रेस से जुड़े रहे अनिल शर्मा को भाजपा में शामिल तो कर लिया गया लेकिन वह भगवा रंग में नहीं रंग पाए। भाजपा की मैं भी चौकीदार मुहिम से भी अनिल शर्मा ने अभी तक खुद को नहीं जोड़ा है।
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अनिल शर्मा - फोटो : फाइल फोटो
भाजपा की बैठकों और प्रचार से भी अनिल कुछ समय से किनारा करते दिखे। भाजपा भी इस समीकरण को भांप चुकी थी लेकिन खुद मंत्री को हटाने का जोखिम सरकार भी नहीं उठाना चाहती थी। इसके चलते ही मुख्यमंत्री सहित भाजपा नेताओं ने अनिल शर्मा पर मंडी संसदीय सीट पर भाजपा प्रत्याशी रामस्वरूप शर्मा के पक्ष में प्रचार करने का दबाव बनाया। इसके चलते शुक्रवार को अनिल शर्मा ने मंत्री पद से इस्तीफा देकर सभी चर्चाओं पर विराम लगा दिया है।

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अनिल शर्मा - फोटो : फाइल फोटो
अनिल शर्मा मंडी से इस्तीफा देने का मन बनाकर ही शिमला आए थे। बीते मंगलवार को शिमला आने के बाद से अनिल शर्मा के तेवर तल्ख थे। मुख्यमंत्री और भाजपा के खिलाफ उन्होंने जमकर मीडिया में गुबार निकाला। बीते दिनों कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर से भी अनिल शर्मा की मुलाकात की चर्चाएं हैं।
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पंडित सुखराम - फोटो : फाइल फोटो
राजनीति में आश्रय शर्मा को स्थापित करने के लिए सुखराम परिवार ने अपना भविष्य दांव पर लगा दिया है। पोते के लिए जहां दादा पंडित सुखराम ने दोबारा कांग्रेस में एंट्री ली है, वहीं पिता अनिल शर्मा ने मंत्री पद त्याग दिया है। अब इस परिवार के लिए प्रतिष्ठा से ज्यादा राजनीतिक करियर दांव पर लग गया है।
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