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साक्षात्कारः हिमाचल के सीएम जयराम ठाकुर बोले, जीत तय है...बस मार्जिन की लड़ाई है

Wed, 15 May 2019 10:30 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
लोकसभा चुनाव से सवा साल पहले हिमाचल के पहली बार मुख्यमंत्री बने जयराम ठाकुर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसे पर खरा उतरना है। वह ‘अबकी बार फिर चार की चार, एक बार फिर मोदी सरकार’ नारे को बुलंद कर प्रचार का मोर्चा संभाले हुए हैं। चुनाव प्रचार के बीच शिमला में अमर उजाला के मुख्य संवाददाता सुरेश शांडिल्य ने उनसे विशेष बातचीत की। पेश हैं इसके अंश :  
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
पिछली बार प्रचंड मोदी लहर थी, अबकी परिस्थितियां अलग हैं। क्या प्रदेश में चारों सीटों पर जीत बरकरार रखना चुनौती नहीं है? 
चारों सीटें जीतेंगे। हम रिपीट करेंगे। इस बार जीत के मार्जिन की लड़ाई है। कांग्रेस कहीं नहीं ठहर रही। आम जन चाहते हैं कि मोदी ही दोबारा पीएम बनें। हमारी सरकार ने भी उनके सहयोग से एक साल में खूब काम किए। देश को एक मजबूत प्रधानमंत्री चाहिए। देश उन्हीं के हाथ सुरक्षित है। देश की सुरक्षा बहुत बड़ा मुद्दा है। 
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरभद्र सिंह आप पर हमलावर हैं और आप डिफेंसिव। क्या कारण है?  
मैं उनकी उम्र के हिसाब से इज्जत करता हूं। वीरभद्र को मुकेश अग्निहोत्री ने उकसाया। बाद में वीरभद्र ने कहा भी कि उन्होंने ऐसा कहां कहा। मेरे बारे में तू-तड़ाक से बात करते अग्निहोत्री जल्दबाजी में हैं और वह इस चक्कर में कहीं अपना नुकसान न कर बैठें।

आप मंडी को ज्यादा वक्त दे रहे हैं, दूसरे नेता अपने हलकों को, पूरा प्रदेश क्यों नहीं? 
मैं खुद हर क्षेत्र में हो आया हूं। दो हलके ही बचे हैं। शांता कुमार पर कांगड़ा और प्रेम कुमार धूमल पर हमीरपुर की विशेष जिम्मेवारी है। जैसे-जैसे वक्त मिल रहा है, वह बाहर भी प्रचार कर रहे हैं। भाजपा नेताओं को काम बांटा गया है, उसी हिसाब से प्रचार कर रहे हैं। 

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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
शांता के विरोधाभासी बयानों से कोई नुकसान तो नहीं? 
शांता जी मजाक करते हैं। वह खुद ही कह चुके हैं कि वह इस बार चुनाव लड़ाने का आनंद ले रहे हैं। वह जमकर प्रचार कर रहे हैं। कांगड़ा के अलावा बाहर भी प्रचाररत हैं। 
प्रदेश में सीटों की संभावना तो कांग्रेस खेमे को भी है। क्या कहेंगे? 
कांग्रेस की तुलना में प्रचार में भाजपा बहुत आगे है। कांग्रेस शुरू से पिछड़ी है। चाहे नामांकन की बात हो या जनसभाओं की। भाजपा के पक्ष में माहौल है। कांग्रेस में तो यही पता नहीं है कि नेता कौन है। अब वीरभद्र की पहले जैसी पकड़ नहीं। कुलदीप राठौर अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। अग्निहोत्री खुद को नेता माने हुए हैं, जबकि उन्हें कांग्रेस में कोई नहीं मानता।  
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
भाजपा की मंत्रियों और विधायकों की सक्रियता पर नजर है क्या?   
- मंत्रियों, विधायकों और तमाम नेताओं को अपनी परफार्मेंस दिखानी होगी। चुनाव के बाद मंत्रिमंडल में भी फेरबदल संभव है। ढील पर पोर्टफोलियो और मंत्री तक बदले जा सकते हैं। 
लीड दिलाने वालों को ओहदे देने के प्रलोभन भी दे रहे हैं क्या? 
- ये प्रलोभन नहीं। जो बेहतरीन काम करेगा, उसका पार्टी ख्याल तो रखेगी ही। सब प्रमुख नेता अपने-अपने हलकों में काम कर रहे हैं।  
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
वीरभद्र-सुखराम के इकट्ठे होने से क्या फर्क पड़ा है? 
- वीरभद्र और सुखराम के इकट्ठा होने पर ही विवाद है। वीरभद्र खुद सुखराम से गले मिलने की बात पर सफाई दे चुके हैं कि उन्होंने कौन सी शादी करनी है। इनसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वक्त बदल गया है। 
अनिल शर्मा ने भी मंत्री पद छोड़ आपको झटका दिया? 
- इसका फर्क हमें नहीं, सुखराम परिवार को ही पड़ेगा। अनिल को भाजपा में भी मैं ही लाया। कांग्रेस से लड़ते तो हालत कौल सिंह ठाकुर जैसी होती। सुखराम परिवार को एहसानमंद होना चाहिए। 
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
कई भाजपा नेता रूठकर घर बैठे हैं, नुकसान नहीं करेंगे? 
- ये एकाध ही हैं। ये कांग्रेस के लिए प्रचार नहीं कर रहे। कोई नुकसान नहीं।  
क्या भाजपा अध्यक्ष सत्ती के बयानों से परेशानी नहीं बढ़ी? 
- यह सब एकतरफा नहीं होता। देश के प्रधानमंत्री पर राहुल गांधी की अभद्र टिप्पणी से भाजपा कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुईं। ऐसे बयान भावुक होकर ही निकलते हैं।  

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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस अपने पीछे सीआईडी लगाने के भी आरोप लगा रही है?  
- कांग्रेस के पास असल में कोई मुद्दा नहीं है, तभी बेसिर-पैर के विषय उठा रही है।  
चुनाव प्रचार में आरएसएस भी हावी है क्या? 
- आरएसएस कभी दखल नहीं देता। केवल सुझाव देता है।   
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
और क्या कहते हैं?   
- मैंने हिमाचल को एक दृष्टि से देखा है। सत्ता संभालने के बाद कमरे में बैठकर सरकार नहीं चलाई। जमीन पर उतरकर काम किया है। मेरे पास गांव और शहर दोनों के अनुभव हैं। मैंने खेतों में हल चलाया है, सेब तोड़े हैं, फलों की पैकिंग की है। खेतों से गंदम निकाली है। मैं हर आम आदमी की पीड़ा और जरूरतें समझ सकता हूं। दावे से कहता हूं कि यहां किसी भी मुख्यमंत्री के पास ऐसा अनुभव नहीं रहा होगा। हिमाचल की जनता ने मुझ पर भरोसा जताया है। लोकसभा चुनाव में भी जनता साथ देगी। 
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