हिमाचल में पिछले तीन दिन से जारी मूसलाधार बारिश ने कहर बरपाया है। 72 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश से बीते वर्ष 11 अगस्त को 48 लोगों की जान लेने वाली मंडी की कोटरोपी पहाड़ी फिर दरक गई है।
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पहले मैगल और फिर कोटरोपी में पहाड़ी दरकने से मलबा पठानकोट-मंडी-मनाली नेशनल हाईवे पर आ गया है। शुक्रवार रात करीब डेढ़ बजे कोटरोपी और मैगल की पहाड़ी धंसने से पौने सात घंटे मार्ग बंद रहा।
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शनिवार सुबह सवा आठ बजे मार्ग खोला, लेकिन शाम 5:15 बजे कोटरोपी में फिर मलबा आने से मार्ग बंद हो गया है। जिला प्रशासन ने एहतियातन यातायात डायवर्ट कर दिया है।
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वहीं, रिब्बा नाले में बाढ़ आने से हिंदुस्तान-तिब्बत एनएच-5, भूस्खलन होने से कुल्लू-मनाली हाईवे चार घंटे तक बंद रहा।
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प्रदेश के करीब 310 संपर्क मार्गों पर यातायात बाधित हो गया है। भारी बारिश से कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
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रिकांगपिओ से पूह और रामपुर से रोहडू का संपर्क कट गया है। भुंतर में ब्यास व पार्वती नदी का जलस्तर बढ़ने से झुग्गियों में रहने वाले प्रवासी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है।
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किन्नौर में नाले का पानी और मलबा पानवी प्रोजेक्ट में घुस गया। परियोजना की ट्रैंच बियर और इंटेक साइट तबाह हो गई है। यहां बिजली बहाल होने में 20 दिन लग सकते हैं।
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नाथपा झाकड़ी परियोजना में 17 घंटों तक विद्युत उत्पादन ठप रहा। सिरमौर में एचआरटीसी की 8 बसें फंस गई हैं। राजगढ़ क्षेत्र में मकान सहित 11 गोशालाएं ढह गई हैं। करसोग के जाच्छ स्कूल भवन का एक कमरा ध्वस्त हो गया है।
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लडभड़ोल में मकान पर मलबा गिर गया। तीन लोगों को सुरक्षित निकाला गया। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने तीन अगस्त तक पूरे प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है।
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खराब मौसम से शिमला, भुंतर और गग्गल में शनिवार को हवाई उड़ानें नहीं हुई। कालका-शिमला हैरिटेज रेलवे ट्रैक पर चट्टान गिरने से बीती शाम दो घंटे ट्रेन के पहिये रुके रहे।
शुक्रवार रात और शनिवार को गोहर में 162, नाहन में 110, धर्मपुर-रेणुका में 105, गग्गल में 98, सोलन में 97, जोगिंद्रनगर में 95, राजगढ़ में 93, धर्मशाला में 73, रामपुर में 63, कसौली में 55, शिमला में 54, कुफरी में 50 और सुंदरनगर में 45 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड हुई।