कोटखाई की गुड़िया जीना चाहती थी। दुराचार करने के बाद जब मुख्य आरोपियों ने उसे मारने की योजना बनाई तो गुड़िया बुरी तरह डर गई। आंखों में आंसू लिए इस गुड़िया के मुंह से निकले अंतिम शब्द थे- ‘जो करना है करो, लेकिन मुझे जान से मत मारो। मैं जीना चाहती हूं, मैं किसी का नाम नहीं बताऊंगी।’
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दुराचार के बाद करीब पांच मिनट तक गुड़िया जान से न मारने भीख मांगती रही, लेकिन मुख्य आरोपी नहीं माना, उसने अपने साथियों से कहा कि - ‘बेइज्जती हो जाएगी’। ऐसे में आरोपी ने गुड़िया का गला दबाया। 10 से 12 मिनट तक गुड़िया छटपटाती रही। उसके बाद वह बेसुध हो गई।
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पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच शुक्रवार पांच आरोपियों को मेडिकल करवाने के लिए दीनदयाल उपाध्यक्ष अस्पताल लाया गया। एएसपी, डीएसपी समेत करीब 40 जवान के पहरे में इन पांचों का मेडिकल कराया गया। इनके चेहरों पर इस दरिंदगी को लेकर जरा भी शर्म, अफसोस और पछतावा नहीं था। एक नेपाली ने तो...
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एक नेपाली ने तो हंसते हुए बेशर्मी से कहा कि ‘हां मैंने रेप किया’। इस पर एक महिला स्वास्थ्य कर्मी ने उसे डांटा भी। जहां आरोपियों के शरीर की जांच पड़ताल की जा रही थी वहां अमर उजाला के संवाददाता मौके पर मौजूद थे। इस दौरान आरोपी से हुई बातचीत के कुछ अंश-
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आरोपी और संवाददाता से हुई बात के अंश
सवाल : क्या किया तैने?
आरोपी : सर जी, मैंने कुछ नहीं किया, मैं नपुंसक हूं।
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सवाल: झूठ बोलता है?
इतने में आरोपी की सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मी ने बीच में ही कहा -, ये सच बोल रहा है, इससे कुछ नहीं होता।
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सवाल : जब लड़की को मार रहे थे तो तू बचाने क्यों नही गया?
आरोपी : मैं बोलता रहा, भाई जी मत मारो, मत मारो, पर ये लाल टी-शर्ट वाला नहीं माना।
अपने साथी की तरफ इशारा करते हुए।
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सवाल : अंदर चार लोग बैठे हैं, क्या सब ने रेप किया ?
आरोपी : भीतर जो कोने पर बैठा है जो आगे से गंजा है, इसने भी कुछ नहीं किया।
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सवाल : यह गढ़वाल का है, इसलिए कह रहे हो ?
आरोपी : कसम से।
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सवाल: आशीष कहां है ?
आरोपी चुप रहा
पुलिस कर्मी बोला - उसे भी मेडिकल के लिए लाया जा रहा है।
सवाल नेपाली से- तैने रेप किया
नेपाली - हंसते हुए- हां, मैन रेप किया है।
वहां मौजूद एक महिला स्वास्थ्य कर्मी ने इस बदतमीजी पर उसे लताड़ते हुए कहा - चल नीचे बैठ।