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16 साल बाद भी शहीद कैप्टन को इंसाफ नहीं दिला पाई सरकार

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1999 के कारगिल युद्ध में शहीद इस शूरवीर को न्याय दिलाने के मामले में भारत सरकार गंभीर नहीं है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में शहीद का मामला सुनवाई के लिए नहीं आ पाया।
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16 साल बाद भी शहीद कैप्टन को इंसाफ नहीं दिला पाई सरकार

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केंद्र सरकार ने 25 अगस्त तक सुप्रीम कोर्ट में संशोधित हलफनामा पेश न कर अपने सुस्त इरादे जता दिए। ऐसे में एक जून को केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की ओर से दी गई स्टेटमेंट पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में शहीद का केस लड़ रहे वकील अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि मामला सुनवाई के लिए टेक अप नहीं हो पाया। केंद्र सरकार ने भी संशोधित हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में पेश नहीं किया।

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एक जून को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि उनका मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट से मांग करेगा कि शहीद के मामले को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भेजा जाए। इसके लिए विदेश मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट में संशोधित हलफनामा पेश करेगा। लेकिन, मंगलवार तक विदेश मंत्रालय ने कोई भी हलफनामा पेश नहीं किया।
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16 साल बाद भी शहीद कैप्टन को इंसाफ नहीं दिला पाई सरकार

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वहीं 16 साल से न्याय के लिए लड़ रहे शहीद कैप्टन सौरभ कालिया के पिता एनके कालिया ने बताया कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है। उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट उपयुक्त कार्रवाई कर केंद्र सरकार को मामले को पाकिस्तान और इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के समक्ष उठाने के लिए निर्देश देगा।
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हिमाचल के कांगड़ा जिले के पालमपुर निवासी कैप्टन सौरभ कालिया सेना की 4 जाट रेजिमेंट में तैनात थे। 15 मई 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान सेना ने उन्हें और उनके पांच साथियों को पकड़ कर यातनाएं दी थीं।
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पाकिस्तान सेना ने जब शव भारत सरकार को सौंपा था तो कैप्टन सौरभ कालिया के शरीर कई अंग कटे हुए और गायब थे।

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पाकिस्तान सेना ने उनकी आंखें फोड़ दी थीं। कई अंग निकाल दिए गए थे। दांत और हड्डियां तोड़ दी थीं। बेटे के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पिता एनके कालिया वर्षों से न्याय की लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं।
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कारगिल शहीद कैप्टन सौरभ कालिया।
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