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Paper Leak Himachal: हिमाचल में पहले भी लीक हो चुके हैं कई पेपर, रद्द करवानी पड़ीं ये परीक्षाएं

Fri, 23 Dec 2022 11:08 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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पेपर लीक - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग की 25 दिसंबर को होने वाली पोस्ट कोड 965 जेओए आईटी भर्ती की लिखित परीक्षा से दो दिन पहले पेपर लीक हो गया। जिस महिला पर पेपर लीक करने का आरोप है, वह चयन आयोग की गोपनीय शाखा में वरिष्ठ सहायक के पद पर लंबे समय से कार्यरत है। एक अभ्यर्थी की शिकायत पर विजिलेंस ने महिला और उसके बेटे समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आयोग ने परीक्षा भी रद्द कर दी है। आयोग ने मई 2022 में 198 पदों के लिए आवेदन मांगे थे। अक्तूबर में 121 पद और जोड़े गए। 319 पदों के लिए 476 परीक्षा केंद्रों में 1,03,344 अभ्यर्थियों ने परीक्षा देनी थी। लेकिन यह पहली बार नहीं जब हिमाचल में किसी भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ हो। इससे पहले भी कई बार पेपर लीक हो चुके हैं जोकि सभी के लिए चिंता का विषय है। जानिए, हिमाचल में कब-कब लीक हुए भर्ती व अन्य परीक्षाओं के पेपर...
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पुलिस कांस्टेबल - फोटो : अमर उजाला
2019 में रद्द हो गई थी पुलिस भर्ती
पूर्व जयराम सरकार के कार्यकाल में अगस्त 2019 को आयोजित हुई पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा के दौरान परौर सत्संग भवन में बने परीक्षा केंद्र में चार युवक दूसरे का पेपर देते रंगे हाथ पकड़े गए थे, जबकि दो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से परीक्षा देते धरे गए। बाद में परीक्षा को रद्द करना पड़ा था। 11 अगस्त को पुरुष व महिला पुलिस कांस्टेबलों के 1063 पदों के लिए प्रदेश भर में लिखित परीक्षा ली गई थी। पुलिस भर्ती फर्जीवाड़े में नकल करने, नकल करवाने और मुख्य आरोपी को भगाने में मदद करने वालों सहित 34 लोगों को गिरफ्तार किया था। बाद में कोर्ट में चालान पेश कर उन पर मुकदमा चलाया गया, जिनमें से अब लगभग सभी आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया है। 
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
2022 में पुलिस कांस्टेबल भर्ती पेपर फिर हुआ लीक
इसके बाद हिमाचल पुलिस कांस्टेबल के पदों 1334 पदों के लिए 27 मार्च 2022 को परीक्षा हुई थी। 6 मई को यह परीक्षा विवादों के बाद रद्द हो गई। पुलिस और सीआईडी ने मामले दर्ज किए तो 31 मई को पांच आरोपियों की पहली बार गिरफ्तारियां हुईं। अब तक 181 लोगों के खिलाफ कांगड़ा, शिमला और मंडी में तीन चार्जशीट दायर की जा चुकी हैं। पुलिस भर्ती के तार राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश आदि तक जुडे़। नेपाल सीमा से भी एक आरोपी को पकड़कर लाया गया। हिमाचल में तो सभी जिलों में इसके तार जुडे़ रहे। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने छह माह बाद दो एफआईआर दर्ज कीं। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ये दोनों एफआईआर चंडीगढ़ ब्रांच में पंजीकृत की थीं।  अब सीबीआई मामले की जांच कर रही है।

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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
एचपीयू की यूजी प्रश्नपत्र के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही खुल गए थे
एचपीयू की 7 अप्रैल 2022 को होने वाली यूजी की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र 4 अप्रैल को ही खोल दिए गए थे। जांच में खुलासा हुआ कि प्रदेश विश्वविद्यालय के यूजी प्रथम और द्वितीय वर्ष के प्रश्नपत्र प्रदेश के 22 कॉलेजों में लीक हुए थे। इनमें कुछ कॉलेजों में प्रश्नपत्र गायब पाए गए, जबकि कुछ में इन्हें खोल दिया गया या फिर नष्ट कर दिया गया था। इसका खुलासा कुलपति प्रो. एसपी बंसल की ओर से मामले की जांच के लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट में हुआ है। बाद में परीक्षा रद्द कर दोबारा करवाई गई। 
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पेपर लीक मामला - फोटो : अमर उजाला
 पांचवीं कक्षा के हिंदी विषय का पेपर भी हुआ था लीक
शिक्षा बोर्ड की पांचवीं कक्षा की हिंदी विषय की परीक्षा का प्रश्न पत्र  2020 में एक दिन पहले ही लीक हो गया था। हिंदी का पेपर 18 मार्च को होना था, लेकिन निजी स्कूल ने 17 मार्च को छ्ट्टी के ही दिन पेपर करवा दिया।  जब इसकी जानकारी प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को लगी तो निदेशालय ने हिंदी का पेपर पूरे प्रदेश में रद्द कर दिया।
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हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर। - फोटो : अमर उजाला
ये भर्तियां भी रही विवादों में
सितंबर 2021 में भी जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (जेओए) आईटी की परीक्षा विवादों में रही है। सुंदरनगर के निजी एमएलएसएम कॉलेज में उस दौरान मोबाइल से फोटो खींचकर बाहर भेजे गए थे। इस मामले में नेरचौक के एक निजी विश्वविद्यालय का नाम भी सामने आया था। आरोपी उसी विवि का ही कर्मचारी था, जिसकी मदद करने के मकसद से पेपर लीक हुआ। मामले में करीब एक दर्जन लोग नामजद हुए, लेकिन परीक्षा रद्द नहीं हुई। तर्क था कि संबंधित सीरीज का पेपर सिर्फ एक ग्रुप में ही गया है। इसका रिजल्ट भी निकल चुका है। प्रदेश में एचआरटीसी की कंडक्टर भर्ती के तहत कुछ उम्मीदवारों से डिजिटल उपकरण भी पकड़े गए थे। प्रदेश में पटवारी की भर्ती भी सुर्खियों में रही। बाद में सीबीआई ने इस भर्ती को क्लीन चिट दे दी थी। 
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हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग। - फोटो : अमर उजाला
20 वर्ष पूर्व भी हुआ था भर्ती घोटाला
 वर्ष 2001-02 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल में सरकारी पदों पर भर्तियां हुई थीं। प्रदेश में भाजपा की सरकार के रहते चयन बोर्ड के माध्यम से हुई इन भर्तियों में धांधली के आरोप लगे थे। वर्ष 2004 में सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस भर्ती फर्जीवाड़े के मामले में जांच के आदेश दिए थे। विजिलेंस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की और चालान कोर्ट में पेश किया। आरोप साबित होने पर हमीरपुर सत्र न्यायालय ने चयन बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन समेत छह को सजा सुनाई थी। सभी हाईकोर्ट चले गए। कोर्ट ने भ्रष्टाचार समेत अन्य धाराएं हटाते हुए एक-एक साल का कारावास और पांच-पांच हजार जुर्माने की सजा सुनाई। फिर इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में अपील की गई। हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने अपील खारिज कर दी। सर्वोच्च न्यायालय में अपील खारिज होने के बाद सभी को विजिलेंस ने गिरफ्तार कर लिया, जिन्हें बाद में जेल भेज दिया गया। 
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 मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान
सरकार की सक्रियता से पकड़ में आए पेपर लीक करने वाले : नरेश
 मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान ने कहा कि सरकार की सक्रियता से पेपर लीक करने वाले पकड़े गए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश की बागडोर संभालने के पहले ही दिन स्पष्ट कर दिया था कि जनता को पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी प्रशासन प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री की इस प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए पुलिस विभाग सभी परीक्षाओं की कड़ी निगरानी कर रहा है। नरेश चौहान ने कहा कि इसी कड़ी में शुक्रवार को बड़ी सफलता मिली है। प्रदेश के युवाओं से भर्तियों के नाम पर कोई भी धोखाधड़ी नहीं होने दी जाएगी। 
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