विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मनाली में लोग अब अंटार्कटिका जैसा एहसास कर सकेंगे। मनु नगरी से सटे हामटा पीक में लाहौल के युवकों ने बर्फ का घर यानी इग्लू तैयार किया है। दावा है कि देश के इस पहले इग्लू स्टे में ठहरने पर सैलानी अंटार्कटिका जैसा एहसास करेंगे। पूरी तरह बर्फ से बनाए इस अनोखे घर में एक महीने तक सैलानी ठहर सकेंगे। इग्लू का यह कनसेप्ट प्रदेश में पर्यटन को नई पहचान दिला सकता है।
विज्ञापन
2 of 7
स्कीइंग और पर्वतारोहण के दीवाने लाहौल-स्पीति के टशी और विकास को बर्फ में मस्ती करते -करते अचानक इग्लू बनाकर इसे पर्यटन व्यवसाय से जोड़ने का आइडिया आया। उन्होंने गूगल से इग्लू तैयार करने की तकनीक और इसकी बारीकियां सीखीं।
विज्ञापन
3 of 7
समुद्र तल से करीब 12 हजार फुट ऊंचाई पर स्थित हामटा पीक में विकास और टशी ने नेपाली मजदूरों की मदद से बर्फबारी के बीच एक इग्लू तैयार किया। इसे होटल के कमरों की तर्ज पर सजाने को सोलर लाइट्स की मदद से बिजली कनेक्शन दिया गया। इग्लू के भीतर एक बेड रूम के साथ बाथरूम भी बनाया गया है।
4 of 7
ट्रायल के तौर पर सोशल मीडिया में फर्स्ट इग्लू स्टे इन इंडिया के नाम से पेज बनाकर पोस्ट किया गया। एक सप्ताह में ढाई हजार से ज्यादा लोगों ने इग्लू में रात गुजारने की इच्छा जाहिर की है। इनमें कई विदेशी भी शामिल हैं। विकास ने बताया कि तापमान अनुकूल बना रहे तो एक इग्लू कम से कम एक महीने तक टिक सकता है।
विज्ञापन
5 of 7
इसे तैयार करने के लिए पाउडर की बजाय हल्का सा गीला बर्फ सबसे बेहतर है। टशी कहते हैं कि हामटा पीक में तापमान शून्य से करीब आठ डिग्री नीचे है। इग्लू के भीतर जीरो डिग्री तापमान में रात बिताना अलग अनुभव है। विकास लाहौल के रांग्वे और टशी केलांग से ताल्लुक रखते हैं।
विज्ञापन
6 of 7
उपायुक्त लाहौल-स्पीति विवेक भाटिया कहते हैं कि लाहौल जैसे इलाके में टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए इग्लू का कन्सेप्ट मील का पत्थर साबित हो सकता है। यहां साल में छह महीने बर्फ की चादर बिछी रहती है। विकास व टशी की इस पहल को रोहतांग टनल बनने के बाद लाहौल में व्यावहारिक रूप दिया जा सकता है।
अंटार्कटिका में एस्कीमो जाति के लोग रहने के लिए बर्फ का घर बनाते हैं। ये लोग सदियों से बर्फ के ऐसे घरों में रहते हैं। इन्हें इग्लू कहा जाता है। अंटार्कटिका में तापमान अमूमन शून्य से नीचे रहता है। माना जाता है कि इग्लू के भीतर तापमान शून्य से नीचे नहीं जाता।