खली के बार बार कहने पर भी सरकार ने उनकी एक ख्वाहिश पूरी नहीं की। उनका ये दर्द एक बार फिर सामने आया है। वे सरकार के रवैये से बेहद नाराज हैं। खली कहते हैं कि वे बार बार सरकार से मिले लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। आइए जानते हैं क्या थी खली की ख्वाहिश-
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डब्ल्यूडब्ल्यूई चैंपियन बनने के बाद खली चाहते थे कि भारत में भी ऐसे रेसलर हैं जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं। इसके लिए खली उन्हें आगे लाना चाहते थे। इसके लिए खली ने खुद ही एक प्लान तैयार किया।
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खली खुद अपने बलबूते ऐसी अकादमी खोलना चाहते थे जहां युवाओं को ट्रेनिंग की सारी सुविधाएं मिल सकें। इसके लिए उन्होंने हिमाचल में ही अकादमी खोलने की तैयारी कर ली। मगर सरकार ने उनकी एक नहीं सुनी।
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खली ने सरकार से अकादमी खोलने के लिए उपयुक्त जगह की डिमांड की थी मगर सरकार ने उनकी मांग को अनसुना कर दिया। बार बार कहने पर भी सरकार ने खली को कोई सहयोग नहीं दिया। मजबूरन उन्हें पंजाब का रुख करना पड़ा। खली ने ये सारी बात हाल ही में हिमाचल के ऊना में हुए एक कार्यक्रम में सबके साथ साझा की।
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खली ने कहा कि उनका हिमाचल में रेसलिंग अकादमी खोलने का सपना है। अकादमी खोलने को उन्होंने कई बार प्रयास भी किया। लेकिन राज्य सरकार से उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला। सरकार के उदासीन रवैये से वह निराश हैं।
ग्रेट खली ने कहा कि यदि हिमाचल का युवा इस खेल में अपना नाम चमकाना चाहता है, तो वह पंजाब में उनकी अकादमी में आए। कहा कि स्पोर्ट्स के क्षेत्र में हमारा देश का काफी पिछड़ा हुआ है। वह हिमाचल से संबंध रखते हैं, तो उनकी इच्छा है कि हिमाचल के युवा भी खेल क्षेत्र में खूब मेहनत कर अपने देश और माता-पिता का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि हिमाचल के लोग भोले-भाले और मेहनती हैं।