जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में पाकिस्तानी गोलाबारी में शहीद हुए सूबेदार शशि शर्मा की पार्थिव देह शुक्रवार सुबह साढ़े सात बजे नादौन स्थित उनके पैतृक गांव गलोल पहुंची। इसके बाद शहीद का सैनिक सम्मान के साथ मान खड्ड किनारे अंतिम संस्कार कर दिया गया। शहीद के 10 वर्षीय पुत्र अक्षय शर्मा ने मुखाग्नि दी।
विज्ञापन
2 of 5
शहीद की दोनों बेटियों सहित काफी संख्या में महिलाएं भी उपस्थित रहीं। सेना की 9 कोर जालंधर से आई सेना की टुकड़ी ने कैप्टन सजिन जेम्स की अगुवाई में आखिरी सलामी दी। 19 पंजाब रेजिमेंट के जवानों ने भारत माता की जय, रेजिमेंट की जय तथा पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। ये सभी जवान शहीद शशि के साथ मोर्चे पर डटे हुए थे।
विज्ञापन
3 of 5
नायब सूबेदार राम सिंह, मनमोहन कुमार, दलजीत सिंह आदि ने बताया कि 18 जुलाई सुबह 9 बजे पाकिस्तान की ओर से भारी गोलीबारी हो रही थी। शशि कुमार शर्मा सीमा से सटे बंकर में सेना की एक टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे। इसी दौरान एक गोला बंकर की खिड़की के पास गिरा। इससे वे बुरी तरह घायल हो गए। उन्हें तुरंत बेस कैंप पहुंचाया गया। यहां से उधमपुर लाया गया, लेकिन 19 जुलाई को सुबह सेना के अस्पताल में शशि ने अंतिम सांस ली।
4 of 5
इस दौरान 19 पंजाब रेजिमेंट के रिटायर्ड कर्नल एमएस परमार और कर्नल धर्म सिंह, विधायक विजय अग्निहोत्री, प्रशासन की तरफ से एसडीएम नादौन अमित मेहरा, तहसीलदार अनिल मनकोटिया, डीएसपी गोपाल वर्मा, पूर्व सैनिक कॉरपोरेशन के चेयरमैन कर्नल विधि चंद लगवाल, बीडीसी चेयरमैन सुनील बिट्टू, बीरबल समेत आसपास क्षेत्र के सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने गलोल गांव में शहीद शशि कुमार शर्मा के घर पहुंचकर उनके परिवार को ढांढस बंधाया। शहीद शशि शर्मा के घर पर शोक संलिप्त परिवार से मुलाकात के दौरान धूमल बोले - देश के लिए कुर्बानी देने वाले वीर सपूतों के मां-बाप धन्य होते हैं। भाजपा परिवार उनके साथ इस दुख की घड़ी में खड़ा है। शहीद शशि शर्मा ने अपने माता-पिता के साथ हिमाचल का सिर गर्व से ऊंचा किया है।