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Himachal Weather: शिमला में बारिश, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी, कसौली-राजगढ़ में ओलावृष्टि

Mon, 20 Mar 2023 09:40 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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शिमला के उपरी भागों में बर्फबारी, कसौली में ओलावृष्टि। - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश में येलो अलर्ट के बीच सोमवार को रोहतांग, शिकारी देवी, भरमौर, कुफरी, नारकंडा समेत ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई। शिमला समेत प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में बादल झमाझम बरसे। कई जगह ओलावृष्टि भी हुई। बारिश-बर्फबारी से प्रदेश में ठंड बढ़ गई। मौसम खराब रहने से अधिकतम तापमान में आठ डिग्री तक कमी दर्ज हुई। मंडी की बल्ह घाटी के भंगरोटू स्कूल में बिजली गिरने से आईटी शिक्षक बेहोश हो गईं। जलोड़ी जोत में बर्फबारी से आनी-कुल्लू नेशनल हाईवे 305 ठप हो गया। तीन दिनों से बंद उदयपुर-पांगी मार्ग बहाल होने के चार घंटे के बाद हिमस्खलन होने से दोबारा बंद हो गया है।

ट्रांसगिरि क्षेत्र की दर्जनों पंचायतों में ब्लैकआउट
सिरमौर के ट्रांसगिरि क्षेत्र की दर्जनों पंचायतों में ब्लैकआउट हो गया है। प्रदेश भर में 23 सड़कें और 5 पेयजल योजनाएं सोमवार शाम तक ठप रहीं।  तांदी-पांग-संसारीनाला सड़क पर तिंदी-श्योर के बीच हिमस्खलन की घटना से पांगी के लोगों को संपर्क लाहौल के साथ कुल्लू-मनाली से कट गया है। सीमा सड़क संगठन ने सोमवार सुबह 9:30 बजे मार्ग खोला था लेकिन, दोपहर बाद करीब 2:00 बजे हिमस्खलन आने से फिर बंद हो गया। अटल टनल रोहतांग होकर वाहनों की आवाजाही सामान्य रूप से चलती रही। बारिश से बागबानों और किसानों को अब नुकसान का डर सता रहा है। सब्जियों के लिए अधिक बारिश ठीक नहीं है। सेब सहित गुठलीदार फलों की फ्लावरिंग में भी अधिक बारिश ठीक नहीं है। कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. अतुल डोगरा ने कहा कि बारिश होने से गेहूं की फसल को काफी लाभ होगा।

24 मार्च तक मौसम खराब
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने प्रदेश के कई भागों में 24 मार्च तक मौसम खराब रहने के आसार जताए हैं। 23 व 24 मार्च को कई क्षेत्रों में बारिश-बर्फबारी की संभावना है। वहीं, 21 व 22 मार्च को भी मध्य व उच्च पर्वतीय एक-दो स्थानों में बारिश-बर्फबारी हो सकती है। 

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नारकंडा में बर्फबारी। - फोटो : संवाद
शिमला में मूसलाधार बारिश
राजधानी शिमला में मूसलाधार बारिश हुई। कुफरी, नारकंडा, खड़ापत्थर में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है। तापमान में भी भारी गिरावट आई है। ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचा है। बर्फबारी के बाद सोमवार देर शाम राष्ट्रीय राजमार्ग 05 पर कुफरी, फागू और नारकंडा में सड़क पर फिसलन से वाहनों का संचालन प्रभावित हुआ है। 

 
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हाटू पीक पर बर्फबारी। - फोटो : अमर उजाला
जलोड़ी जोत पर भी बर्फबारी, यातायात बंद
20 मार्च को बर्फबारी ने लोगों को चौंकाया है। राजधानी शिमला में सोमवार दोपहर बाद मौसम ने एकाएक करवट बदली जिसके बाद दिन में ही अंधेरा छा गया। शहर में ओलावृष्टि भी हुई।  वहीं, आनी के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल जलोड़ी जोत पर चार इंच तक ताजा हिमपात हुआ है। इससे एनएच-305 यातायात के लिए पूरी तरह से बंद हो गया है। खनाग पंचायत के पूर्व उप प्रधान बुद्धि सिंह राणा ने बताया कि दोपहर बाद से जलोड़ी जोत पर बर्फबारी शुरू हो गई। इससे वाहनों की आवाजाही भी बंद हो गई है।
 

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खड़ापत्थर में बर्फबारी। - फोटो : संवाद
उन्होंने कहा कि सोमवार सुबह तक कुल्लू के लिए वाहनों की आवाजाही सुचारु रूप से चल रही थी। एनएच के एसडीओ धनसिंह शर्मा ने बताया कि मौसम खुलते ही सड़क बहाली का कार्य शुरू किया जाएगा। वहीं, मार्च के तीसरे सप्ताह में बर्फबारी होने सेब व अन्य फसलों के लिए नुकसानदायक भी बताई जा रही है।  जनजातीय जिले किन्नौर में सोमवार दोपहर के बाद मौसम ने करवट ली है और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी शुरू हुई। किन्नौर के छितकुल, रक्षम, सुमरा, होगों चूलिंग कुन्नोचारंग, नेसंग और आरसंग सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी हुई है,जबकि निचले इलाकों में मौसम खराब होने पर बारिश होती रही।
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नारकंडा में बर्फबारी। - फोटो : अमर उजाला
अधिकतम तापमान डिग्री सेल्सियस में
नाहन 23.1
ऊना 22.8
हमीरपुर 21.5
मंडी 20.6
सोलन 18.5
चंबा 14.8
धर्मशाला 15.0
शिमला 13.0
कल्पा 11.4
केलांग 7.2
 
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चूड़धार में बर्फबारी। - फोटो : संवाद
सिरमौर जिले की चूड़धार चोटी पर भी सोमवार दोपहर बाद फिर बर्फबारी शुरू हुई। इसके साथ-साथ चूड़धार, जमनाला और कालाबाग आदि क्षेत्रों में भारी बर्फबारी हो रही है। पिछले तीन-चार दिन के बीच चूड़धार में डेढ़ फीट बर्फ गिर चुकी है। सोमवार को 6 इंच ताजा हिमपात हुआ। अभी भी लगातार बर्फबारी जारी है।
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नारकंडा में बर्फबारी। - फोटो : अमर उजाला
बर्फबारी होने से चूड़धार समेत समूचे गिरिपार क्षेत्र के तापमान में भारी गिरावट आ गई है।  राजगढ़ में ओलावृष्टि से गुठलीदार फलों को भारी नुकसान हुआ है। जिला मुख्यालय नाहन में भी सोमवार शाम बारिश का दौर शुरू हो गया। कई इलाकों में अच्छी बारिश होने से फसलों को संजीवनी मिली है। लिहाजा, किसानों ने भी राहत की सांस ली है।

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कसौली में ओलावृष्टि - फोटो : संवाद
कसौली क्षेत्र में ओलावृष्टि से फसलों नुकसान
सोलन जिले में मौसम की दोहरी मार झेल रहे किसानों और लोगों को अब बारिश के बाद राहत मिली है। वहीं कसौली विधानसभा क्षेत्र की कई पंचायतों में हुई भारी ओलावृष्टि से भी किसान-बागवानों को नुकसान झेलना पड़ा है। इसमें मटर और गुठलीदार फलों को नुकसान हुआ है। हालांकि बारिश से किसान-बागवान खुश हैं। इससे अब जिले में टमाटर, शिमला मिर्च की रोपाई का काम भी शुरू हो जाएगा।इसके अलावा गोभी, मटर समेत लहसुन की फसल सूखे से खत्म हो चुकी हैं।

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कसौली में ओलावृष्टि। - फोटो : संवाद
कृषि उपनिदेशक डॉ. डीपी गौतम ने कहा कि जिले में बारिश संजीवनी साबित होगी। हालांकि कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हुई है। इससे मटर और गुठलीदार फलों को नुकसान हुआ है। नुकसान का आकलन किया जाएगा।  बारिश से अब टमाटर, शिमला मिर्च और अन्य नकदी फसलें लगाई जा सकेंगी। वहीं, नालागढ़ क्षेत्र में बारिश के साथ आई तेज हवा से गेहूं समेत अन्य फसलें खेतों में चादर की तरह बिछ गईं। गेहूं की फसल खराब होने से दाना खराब हो जाएगा। इन दिनों नालागढ़ क्षेत्र में गेहूं, मटर, सरसों समेत कई फसलें लगाई गई हैं। ऐसे में अब किसानों के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई है। 

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शिमला में झमाझम बारिश हुई। - फोटो : अमर उजाला
वहीं, नालागढ़ क्षेत्र में बारिश के साथ आई तेज हवा से गेहूं समेत अन्य फसलें खेतों में चादर की तरह बिछ गईं। गेहूं की फसल खराब होने से दाना खराब हो जाएगा। इन दिनों नालागढ़ क्षेत्र में गेहूं, मटर, सरसों समेत कई फसलें लगाई गई हैं। ऐसे में अब किसानों के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई है। 

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मंडी के उपरी क्षेत्रों में बर्फबारी। - फोटो : संवाद
शिकारी देवी मंदिर के कपाट खुलते ही शुरू हो गई बर्फबारी
मंडी जिले की सबसे ऊंची चोटी शिकारी देवी मंदिर के कपाट खुलते ही सोमवार दोपहर बाद बर्फबारी शुरू हो गई। स्थानीय प्रशासन और माता के पुजारी मंदिर में पहुंचकर जैसे ही कपाट खोलने की तैयारियों में लगे तो मौसम का अचानक रुख बदल दिया और बर्फबारी शुरू हो गई। सर्दी में माता के मंदिर के कपाट तीन से चार माह के लिए बंद रहते हैं।

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सराज घाटी के चेत गांव में बर्फबारी। - फोटो : संवाद
मार्च में कपाट खुलते ही बर्फबारी का दौर शुरू होने से प्रशासन और मंदिर कमेटी के लिए मौसम फिर परेशानी का सबब बन गया है। एसडीएम थुनाग पारस अग्रवाल ने कहा कि प्रशासन की टीम शिकारी देवी पहुंच गई है और कपाट खुल गए हैं। उन्होंने बताया कि नवरात्र में माता शिकारी देवी में पूजा अर्चना होगी। उन्होंने लोगों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि मौसम, बारिश और बर्फबारी को देख कर ही माता के मंदिर का रुख करें।
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चंद्रताल के पास फंसे दो याक। - फोटो : संवाद
चंद्रताल के पास फंसे याकों के लिए मांगी मदद
उधर, जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के चंद्रताल क्षेत्र के आसपास पालतू याक फंसे हुए हैं। इसको लेकर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और विधायक रवि ठाकुर से बर्फ में फंसे पालतू पशुओं को राहत पहुंचाने के लिए मदद की गुहार लगाई है। यह याक बर्फ के बीच घास के भूखंड के पास मौजूद हैं। लोगों ने सरकार से हेलीकॉप्टर के माध्यम से चंद्रताल में फंसे पालतू पशुओं को चारा पहुंचाने के लिए मदद मांगी है। स्पीति घाटी के लोसर गांव के निवासी छेरिंग पलदन ने बताया कि चंद्रताल में और भी पालतू याक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि बर्फ ज्यादा होने से एक महीना तक स्थानीय ग्रामीण का चंद्रताल की तरफ पहुंच पाना संभव नहीं हैं।
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