मणिपुर के चंदेल जिले के महामनी गांव में आईईडी ब्लास्ट में शहीद हुए मंडी के अपर पंडोह गांव के जवान राइफल मैन इंद्र सिंह का पार्थिव शरीर तीसरे दिन बुधवार सुबह उनके घर पहुंचाया गया।
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राजकीय सम्मान के साथ शहीद को अंतिम विदाई दी गई। सेना ने बुधवार सुबह शहीद इंद्र सिंह का पार्थिव शरीर सेना के ट्रांजिट कैंप पंडोह पहुंचाया। जहां से सुबह 9 बजे शहीद का पार्थिव शरीर उनके घर लाया गया।
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शहीद के सम्मान में पंडोह बाजार बंद रहा और बीच बाजार में जैसे ही शहीद इंद्र सिंह का शव सेना के वाहन में पहुंचा तो पूरा पंडोह बाजार शहीद इंद्र सिंह अमर रहे के नारों के साथ गूंज उठा।
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पंडोह बाजार में स्कूली बच्चों, व्यापार मंडल और आसपास की पंचायतों से आए हजारों लोगों ने भारत माता की जय और जब तक सूरज चांद रहेगा... इंद्र तेरा नाम रहेगा के नारे लगाए।
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शहीद का शव घर पहुंचते ही हर चेहरा भावुक था। तिरंगे में लिपटे शहीद का शव घर पहुंचने पर शहीद की पत्नी इंद्रा, बेटा उदय और मां रुकमणी के आंसू थम नहीं रहे थे। पत्नी इंद्रा और मां रुकमणी तिरंगे में लिपटे शव से इस तरह लिपट गई जैसे उनका बेटा कई सालों बाद घर आया हो।
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अपर पंडोह में शहीद के घर पर सेना के जवानों ने इंद्र के पार्थिव शरीर को सलामी दी। राफी शमशान घाट पर सेना के जवानों ने जिला प्रशासन की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ शहीद इंद्र सिंह को अंतिम विदाई दी। इस मौके पर शहीद के सात वर्षीय बेटे उदय ने शहीद पिता को मुखाग्नि दी।
शहीद की अंत्येष्टि में मंडी लोकसभा क्षेत्र के सांसद राम स्वरूप शर्मा, पूर्व मंत्री और विधायक जयराम ठाकुर, पूर्व मंत्री अनिल शर्मा, नाचन के विधायक विनोद कुमार, कांग्रेस प्रत्याशी चंपा ठाकुर, डीसी मदन चौहान, एसडीएम पूजा चौहान तथा सेना से आए 18 असम राइफल के एनसीओ एके चक्रवर्ती, जेसीओ अशोक कुमार मौजूद रहे। 18-असम राइफल के एनसीओ एके चक्रवर्ती ने बताया कि इंद्र सिंह इंद्र जैसे जांबाज सैनिक की भरपाई करना मुश्किल है।