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10 फीट बर्फ में 70 साल के बुजुर्ग ने पैदल पार किया रोहतांग दर्रा, ऐसे पूरा किया जोखिम भरा सफर

Wed, 10 Apr 2019 10:22 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोकसर (लाहौल-स्पीति)
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सोनम तंडूप - फोटो : अमर उजाला
70 साल के बुजुर्ग ने मंगलवार को बर्फ से लकदक रोहतांग दर्रे को पैदल पार कर साहस का परिचय दिया। लाहौल के गोंधला निवासी सोनम तंडूप करीब 40 किलोमीटर बर्फ पर और 10 किलोमीटर संकरे रास्ते को पार कर सकुशल मनाली पहुंचे।
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सोनम तंडूप - फोटो : अमर उजाला
15020 फीट की ऊंचाई पर 10 फीट तक बर्फ से लदे रोहतांग दर्रे को पार करने में युवाओं की सांसें फूल जाती हैं। बर्फीला तूफान चलने और रास्ता भटकने से अब तक रोहतांग पर कई लोगों की जान जा चुकी है। 
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सोनम तंडूप - फोटो : अमर उजाला
केलांग-रोहतांग-मनाली मार्ग बंद होने और घाटी से हेलीकॉप्टर की उड़ानें नहीं होने पर नाराज बुजुर्ग निजी कार्य के लिए पैदल ही निकल पड़े। हालांकि, इसमें उनका बर्फ पर चलने का तजुर्बा भी काम आया। भारी बर्फ के चलते रोहतांग बंद होने से लाहौल घाटी के लोग इन दिनों देश-दुनिया से कटे हुए हैं।

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सोनम तंडूप - फोटो : अमर उजाला
रोहतांग टनल से भी अभी स्थानीय लोगों को जाने की बीआरओ ने इजाजत नहीं दी है। 70 वर्षीय सोनम तंडूप सोमवार देर रात अकेले ही गोंधला से मनाली के लिए निकल पड़े। लंबी यात्रा कर वे कोकसर स्थित बचाव चौकी पहुंचे और रोहतांग पार करने वालों में अपना नाम पंजीकृत कराया।
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सोनम तंडूप - फोटो : अमर उजाला
यहां बचाव दल ने उन्हें चाय और बिस्कुट दिए। बचाव टीम रोहतांग के दूसरे छोर तक उनके साथ गई, लेकिन उन्होंने खुद पूरा रास्ता पार किया। उन्होंने करीब 10 घंटों के सफर के बाद हाड़ कंपा देने वाला रोहतांग दर्रा पार किया। यहां से 16 किलोमीटर शॉर्टकट रास्ते से होते कोठी और फिर पैदल मनाली पहुंचे। रेस्क्यू पोस्ट कोकसर के इंचार्ज पवन ठाकुर ने कहा कि उन्होंने मंगलवार को कोकसर की ओर से गोंधला के सोनम तंडूप को रोहतांग दर्रा पार करवाया।
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रोहतांग दर्रा - फोटो : अमर उजाला
हर उम्र का स्वस्थ व्यक्ति पार कर सकता है रोहतांग 
रोहतांग दर्रा पैदल लांघने के लिए प्रशासन ने उम्र की सीमा तय नहीं की है। हर स्वस्थ व्यक्ति रोहतांग दर्रा लांघ सकता है। किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए रोहतांग के दोनों ओर बचाव चौकियों में टीम और फॉर्मासिस्ट तैनात रहते हैं। यहां सांस से संबंधित दवाइयां हर समय उपलब्ध रहती हैं। 
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गर्म कपड़े और खाने-पीने का सामान साथ होना जरूरी
पैदल यात्री गर्म कपड़े, दस्ताने, धूप का चश्मा, गर्म जुराबें और बर्फ में चलने वाले जूतों के साथ ही दर्रा पार करते हैं। रास्ते के लिए पानी के बोतल, पूरी-रोटी, उबला अंडा, सब्जी और सत्तू से बने खाद्य पदार्थ साथ लेकर चलते हैं। घाटी के बुजुर्गों को तजुर्बा होने से दिक्कत नहीं आती।
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