हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की सियून पंचायत के ग्रामीणों ने देश-दुनिया के सामने एक अनोखी मिसाल पेश की है। वे पारंपरिक फसलें उगाने के अलावा जंगली गेंदा उगाकर सालाना लाखों की कमाई कर रहे हैं। वह भी ऐसे बंजर इलाकों में जहां सिंचाई सुविधा भी नहीं है। घोघड़ाधार गांव के 100 परिवार गेहूं के साथ जंगली गेंदा भी उगा रहे हैं। रोचक पहलू यह है कि जंगली गेंदे का बीज यहां के किसान खुद ही तैयार करते हैं। किसानों का दावा है कि वे जंगली गेंदा का सालाना एक करोड़ का कारोबार कर रहे हैं। इनपुट: बिंदर ठाकुर
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गजब! बंजर खेतों में उगा दिया एक करोड़ का गेंदा
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करीब एक दशक पहले सियून पंचायत के ग्रामीणों ने जंगली गेंदा उगाने की शुरुआत की थी। यहां सिंचाई सुविधा न होने से पारंपरिक फसलों की पैदावार बहुत कम होती थी। घोघड़ाधार गांव की मिट्टी लाल है इसी के चलते इसे करिश्माई कहा जाता है। इसकी तसदीक क्षेत्र के दया राम ने की। सबसे पहले उन्होंने गेंदे का बीज जंगलों से एकत्र कर अपने खेतों में डाला और हर साल फसल लेने लगे।
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तेल कंपनियां खरीदती हैं हाथोंहाथ- जंगली गेंदा (टैजटस माइनिटा) चार हजार से लेकर छह हजार फीट की ऊंचाई में पाया जाता है। इस फूल पर कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के वैज्ञानिक भी शोध कर चुके हैं। इसके सार्थक परिणाम निकले हैं। तेल बनाने वाली कंपनियां किसानों से जंगली गेंदा प्रति किलो 15 रुपये तक खरीद रहे हैं।
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दया राम से प्रेरणा लेकर जगदीश चंद, दर्शन लाल, चरणदास, मेघ सिंह और शेर सिंह समेत अन्य किसानों ने भी जंगली गेंदे की बिजाई शुरू कर दी। पारंपरिक फसलों के साथ अब किसान गेंदे से सालाना लाखों की कमाई कर रहे हैं। आज पंचायत के करीब 100 परिवार इस खेती को अपना रहे हैं।
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इसका सुगंधित तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 10 से 12 हजार रुपये प्रति किलो में बिकता है।
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इसके अलावा जंगली गेंदे का फ्लेवर के रूप में वाइन, कैंडी और माउथ फ्रैशनर में उपयोग होता है।
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गेंदे का तेल पान मसाला में भी डलता है। माला बनाने के लिए भी इसकी खूब डिमांड रहती है।
नेचुरल प्लांट डिवीजन आईएचबीटी, पालमपुर के डॉ. वीरेंद्र और डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि किसान अगर पारंपरिक खेती के हटकर जंगली गेंदे की खेती को अपनाए तो न बंदर नुकसान करेंगे और न इस खेती पर कोई खर्चा आता है। किसान जंगली गेंदे की खेती कर स्वावलंबी बन सकते हैं और सालाना लाखों कमा सकते हैं।