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Video: चारों तरफ थी चार फीट बर्फ फिर भी मालिक की लाश के साथ कुत्ता रहा चार दिन, किसी को पास तक नहीं आने दिया

Mon, 26 Jan 2026 09:02 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंबा

सार

इस घटना ने एक बार फिर से कुत्तों की वफादारी और ईमानदारी का परिचय दिया है। शिव की कहानी ने सबको भावुक कर दिया है और उसकी वफादारी को सलाम किया जा रहा है।
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मालिक के शव के साथ कुत्ता रहा चार दिन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के चंबा-भरमौर स्थित भरमाणी माता मंदिर स्थित जोत में पास से लापता हुए 14 वर्षीय पीयूष के साथ एक भावुक कर देने वाला पहलू सामने आया है। पीयूष के साथ उसका पालतू कुत्ता चार दिनों तक 3 से 4 फीट बर्फ में वहीं मौजूद रहा और किसी को शव के पास नहीं आने दिया।

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ईमानदारी और वफादारी की मिसाल
कुत्ते ने अपनी ईमानदारी और वफादारी का परिचय दिया है। चार दिन तक भूखा प्यासा रहने के बावजूद, वह पीयूष के शव के पास डटा रहा। रेस्क्यू टीम ने कुत्ते को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है और वह पूरी तरह सुरक्षित है।

वीडियो शूट करने गए थे पीयूष और विकसित
पीयूष और विकसित राणा नामक दूसरे युवक भरमाणी माता मंदिर की ओर वीडियो शूट करने गए थे, लेकिन लापता हो गए थे। सेना के हेलिकॉप्टर से सर्च ऑपरेशन चलाया गया, जिसके बाद पीयूष का शव बरामद कर लिया गया। दूसरे युवक विकसित राणा की तलाश जारी है। रेस्क्यू टीम मौके पर मौजूद है और तलाश जारी है।

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बर्फ ने बुझा दिए दो घरों के चिराग
भरमाणी धार में बर्फबारी के बीच फंसे दो युवकों की मौत से पूरे भरमौर में मातम है। इस घटना ने उपमंडल के घरेड़ और मलकोता गांव में बर्फबारी ने दो परिवारों के चिराग बुझा दिए। घरेड़ के निवासी विक्रमजीत और नीलम को बेटे पीयूष (13) की मौत ने झकझोर दिया। वहीं, मलकोता की अनिता पति की मौत के बाद बेटे (19) विकसित राणा का कफन में लिपटा शव देखकर बेसुध हो गई।

दोनों का अंतिम संस्कार मंगलवार दोपहर को शव मिलने के बाद शाम को कर दिया गया। इस दौरान दोनों गांवों में मातम छाया रहा। पीयूष आठवीं कक्षा का छात्र था। उसके दो भाई और भी हैं। एक उससे छोटा तो एक बड़ा है। घरेड़ गांव के चूहडू राम ने बताया कि पीयूष काफी मिलनसार था। उसके पिता विक्रमजीत अकसर बीमार रहते हैं। माता नीलम कुमारी और भाई गणेश परिवार को पालन-पोषण करते हैं।

वहीं, दूसरी तरफ विकसित राणा उर्फ सींढू अपने परिवार में इकलौता बेटा था। डेढ़ साल पहले बीमारी के कारण उसके पिता संजय कुमार की मौत हो गई थी। घर में माता अनिता और दादी मां हैं। जैसे ही दोनों को उसकी मौत की खबर मिली तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनके बुढ़ापे का इकलौता सहारा भी उन्हें छोड़कर चला गया। पीयूष और विकसित राणा आपस में ममेरे भाई थी। दोनों को रील बनाने का शौक था।

इसी शौक के चलते वे दोनों 22 जनवरी को भरमाणी धार में गए थे। जहां पर बर्फबारी के बीच फंस गए। दोनों के परिवार उनके जिंदा लौटने की आस लगाए बैठे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जो घर से अपने पैरों पर निकले थे, उन्हें अब कंधों पर लाया गया।
 
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