विज्ञान ने भले ही आज अभूतपूर्व तरक्की कर ली है। कई आपदाओं और आशंकाओं की हमें पहले ही सूचना मिल जाती है। मौसम भी उनमें से एक है। कई ऐसे सैटेलाइट हैं जो हमें पहले ही बता देते हैं कि इस बार सूखा, बाढ़, सुनामी या कोई और प्रकोप आने वाला है। लेकिन हिमाचल के जिला चंबा के जनजातीय इलाके भरमौर में आज भी लोग विज्ञान पर भरोसा करने के बजाय देवताओं की शरण में जाते हैं। देवता सालभर के मौसम की भविष्यवाणी करता है। लोग भी इसे मानते हैं और उसी अनुरूप फसलों की देखरेख और जीवन यापन करते हैं। ऐसा सदियों से चला आ रहा है। कबायली क्षेत्र भरमौर के कुगती में उत्तर भारत का एकमात्र शिव पुत्र कार्तिक का मंदिर है। हर साल 30 नवंबर को कार्तिक स्वामी मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं। कपाट बंद करने से पहले मंदिर के गर्भ गृह में मूर्ति के सामने पानी से भरी एक गड़वी (कलश) को रखा जाता है। इस बार भी ऐसा ही होगा। 14 अप्रैल को बैसाखी पर 136वें दिन मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। यदि कलश पानी से पूरा भरा रहा तो उस वर्ष क्षेत्र में अच्छी बारिश होने और सुख-समृद्धि होने की उम्मीद रहती है।