शिमला के कोटखाई में दसवीं की छात्रा से हुए गैंगरेप और हत्या मामले में भले ही पुलिस ने छह आरोपी पकड़ लिए मगर छह सवालों का जवाब अब भी पुलिस के पास नहीं है। आइए जानते हैं कौन कौन से हैं ये सवाल जो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गए हैं-
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पहला, यह कि जब चार जुलाई को गुड़िया की मौत हो गई थी, तो आखिर छह जुलाई तक खूंखार जंगली-जानवरों वाले इस इलाके में उसकी लाश कैसे बची रही?
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दूसरा, शव के साथ अगर उसके कपडे़ रखे गए थे तो वे इससे पहले बारिश होने के बावजूद वहीं पर सही सलामत कैसे थे? तूफान, बारिश का इन पर कोई असर नहीं दिखा। खराब तक नहीं हुए।
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तीसरा, अगर दो दिन तक लाश वहां पड़ी थी तो उसके हाथ पैर और पूरा शरीर बिलकुल साफ सुथरा कैसे बचा रहा?
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चौथा, दुराचार के दौरान छटपटाहट की वजह से उसके हाथों और शरीर में मिट्टी क्यों नहीं लगी? वहां जमीन पर भी कोई निशान क्यों नहीं मिले। पहले खुद पुलिस भी घर या गाड़ी में गैंगरेप की बात करती रही।
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पांचवां, आमतौर पर जघन्य हत्या करने के बाद नेपाली भाग जाते हैं। लेकिन हत्या के बाद ये भागे क्यों नहीं? वह नौ दिन बाद तक आखिर उसी इलाके में क्या पुलिस के आने का इंतजार कर रहे थे?
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छठा, जो दो नेपाली जो पकड़े गए, उनके डेरे से घटनास्थल की दूरी करीब 200 मीटर है, ये सवाल उठता है कि नेपालियों ने ये हत्या की होती तो वे वहां शव क्यों फेंकते? अगर फेंकते तो दो दिन के भीतर उसे दबा भी सकते थे।
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बेशक पुलिस गुड़िया हत्याकांड के आरोपियों को पकड़ने का दावा कर अपनी पीठ थपथपा रही है, मगर इसके बावजूद कई लोगों ने इस जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मदद सेवा ट्रस्ट की प्रमुख तनुजा थापटा ने कुछ प्रश्न दागते हुए पब्लिक से इस मामले की सीबीआई जांच करवाने की मांग की है। शुक्रवार को ठियोग में चक्का जाम भी होने जा रहा है।
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तनुजा थापटा ने कुछ सवाल करते हुए पुलिस की जांच पर सवाल उठाया है। उन्होंने प्रश्न किया है कि पुलिस की ये सारी तफ्तीश सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने सही तस्वीर पेश नहीं की है। पहले पुलिस सूत्रों के हवाले से सूचनाएं आती रहीं कि ये सब किसी एक आदमी के घर पर हुआ। इसके बाद पुलिस की कहानी एक ही दिन में बार-बार बदल जाती है।
सवाल दागते हुए कहा कि पहला सवाल यह है कि जो फोटो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हुए हैं, वे कहां से आए। अगर वे संलिप्त नहीं थे तो वे सब मीडिया के सामने क्यों नहीं आए? अगर संलिप्त थे तो अब तक कहां लापता हैं? रेप अगर खुले जंगल में ही किया गया तो लड़की की आवाज को किसी ने कैसे नहीं सुनी? यदि नेपाल मूल के लोग ही संलिप्त थे तो वे भाग क्यों नहीं गए? क्या वे पुलिस के आने का इंतजार कर रहे थे। मामला बहुत पेचीदा था। इसे और उलझा दिया गया है।