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सूही मेला: बैंडबाजे के साथ फूलों से सजी पालकी में निकली सूही माता की शोभायात्रा

Sat, 10 Apr 2021 06:43 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, चंबा
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चंबा में सूही माता मेले के शुभारंभ के मौके पर पूजा-अर्चना करतीं राज कन्या श्वेता वर्मन। - फोटो : अमर उजाला
राज कन्या श्वेता वर्मन की ओर से विधिवत पूजा-अर्चना करने के साथ ही तीन दिवसीय सूही मेले का आगाज हो गया है। ‘आया बसोआ माए लगिया सूईयां असां सूईयां देखण जाणा हो’ घुरेई का गायन करते हुए गद्दी समुदाय की महिलाओं की अगुवाई में रानी सुनयना के चिह्न को पिंक पैलेस से सूही माता मंदिर में स्थापित किया गया। सूही मढ़ में इस वर्ष राज परिवार की कन्या श्वेता वर्मन ने विधिवत रूप से पूजा-अर्चना की। श्वेता वर्मन राजा पृथ्वी सिंह की वंशज हैं। प्रशासन और नगर परिषद के निर्देशानुसार माता सुनयना की शोभायात्रा में कोविड नियमों का भी ध्यान रखा गया। 
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उपायुक्त डीसी राणा ने रानी सुनयना की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। - फोटो : अमर उजाला
पिंक पैलेस स्थित रानी सुनयना के चिह्न की राज कन्या ने पूजा-अर्चना की। इस दौरान उपायुक्त डीसी राणा, सदर विधायक पवन नैयर, नगर परिषद अध्यक्ष नीलम नैयर, उपाध्यक्ष सीमा कश्यप सहित अन्य ने रानी सुनयना की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद गृहरक्षक बैंड की ओर से मनमोहक प्रस्तुतियों और वाद्य यंत्रों की धुनों के साथ माता के चिह्न को पिंक पैलेस से बाहर निकालकर फूलों से सजी पालकी में रखकर सूही मढ़ के लिए ले जाया गया।
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- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान माता की पालकी के आगे गद्दी वेशभूषा में कन्या को चलाया गया, जिसके पीछे पारंपरिक वेशभूषा और घुरेई गाती हुई गद्दी  समुदाय की महिलाएं, शहर की महिलाएं, सदर विधायक और डीसी के साथ प्रबुद्ध जन सूही मढ़ पहुंचे। यहां विधिवत पूजा-अर्चना के साथ ही तीन दिवसीय सूही मेले का आगाज हुआ। 

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- फोटो : अमर उजाला
इसलिए मनाया जाता है मेला- राजा साहिल वर्मन ने दसवीं शताब्दी में चंबा की नींव रखी थी। उन्होंने इस नगर को भव्य मंदिरों और देव प्रतिमाओं से सुसज्जित किया। उस समय प्रजा को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा था। दो नदियों के बावजूद चंबा में पीने के पानी की कमी थी। एक रात रानी सुनयना को स्वप्न हुआ कि राजघराने से किसी को बलिदान देना पड़ेगा तभी जाकर जल संकट से छुटकारा मिल सकता है। उस समय भावी राजकुमार युगाकार वर्मन बाल अवस्था में थे, इसलिए रानी सुनयना ने स्वयं का बलिदान करने का मन बनाया। भारी जनसमूह के साथ जीवित समाधि के लिए रानी को शाहमदार पहाड़ी के पास मलूणा नामक स्थान पर ले जाया गया।
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- फोटो : अमर उजाला
उससे पहले रानी ने सूही के मढ़ जहां मेला लगता है, वहां से अंतिम बार चंबा रियासत को देखा। समाधि लेने से पहले रानी सुनयना ने अपनी इच्छा जाहिर की थी कि मेरी याद में हर वर्ष मेला लगाया जाए। यह मेला सिर्फ महिलाओं का मेला होगा और पुरुष इस मेले में न आएं। राज परिवार की बहुएं भी इस मेले में शिरकत न करें। मेले के दौरान केवल राज परिवार की कुंवारी कन्या ही मेरी पूजा करे। उसके बाद रानी सुनयना ने जीवित समाधि ले ली और उसी समय वहां पर पानी का स्रोत फूट पड़ा, जिससे आज भी चंबा नगर को पेयजल की आपूर्ति होती है। हर वर्ष यहां पर रानी सूही की स्मृति में तीन दिवसीय मेला लगता है।
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