सेना में नायक के पद पर तैनात हिमाचल सोलन जिला गांव जोघों के पंकज 30 अगस्त हुए आतंकवादी हमले में गोलियां लगने से गंभीर रूप से जख्मी हो गए। बावजूद इसके वह जल्द ठीक होकर सीमा पर लौटना चाहते हैं। फोटो: विजय राजपूत, नालागढ़
बदन गोलियों से छलनी हैं, देशभक्ति का जज्बा कायम
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दो बार आतंकवादियों से भिड़ंत में तीन गोलियां खाने के बाद भी पंकज शर्मा में देश सेवा का जज्बा कायम है। थल सेना में नायक के पद पर तैनात जोघों के पंकज शर्मा आंतकवादियों के साथ मुठभेड़ में अपना जबड़ा गंवा चुके हैं।
बदन गोलियों से छलनी हैं, देशभक्ति का जज्बा कायम
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पहले 2002 में कारगिल युद्घ के दौरान पाकिस्तानी सैनिक की गोली का शिकार हुए। उस दौरान गोली बाई टांग में लगी और पंकज दो माह तक बेड पर रहे।
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अब 30 अगस्त को कुपवाड़ा में एक ऑपरेशन के दौरान आंतकवादी से मुठभेड़ में पंकज शर्मा दूसरी बार गोली के शिकार हुए। इस बार उन्हें दो गोलियां लगी। पहली गोली से उनका जबड़ा बाहर आ गया जबकि दूसरी गोली से उसके दाईं टांग का घुटना टूट गया।
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पंकज कुपवाड़ा के जंगल में 30 अगस्त को साढ़े 12 से साढ़े चार बजे तक दर्द से कराहता रहा। चार घंटे के बाद सेना के जवान जंगल से ढूंढकर श्रीनगर चिकित्सालय में भर्ती कराया।
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घायल होने के कारण पंकज का चेहरा भी बुरी तरह से खराब हो गया है।
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चेहरे पर इतने जख्म है कि देखने वाले भी कांप जाते हैं। दो बार मौत से मुंह से बाहर निकलने के बाद अभी भी पंकज का जज्बा कम नहीं है। वह ठीक होकर दोबारा देश सेवा करने की इच्छा रखते हैं। फोटो: विजय राजपूत नालागढ़
आतंकवादी हमले में कई गोलियां लगने के बावजू देश के इस असली नायक में देश के मर मिटने का जज्बा कम नहीं हुआ है। इनके जख्म पूरी कहानी को बयां करते हैं। फोटो: विजय राजपूत, नालागढ़