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हिमाचल: युद्ध में विजय हासिल करने के लिए अर्जुन ने इस गांव में की थी चक्रव्यूह की रचना

Sat, 24 Sep 2022 04:55 PM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
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अर्जुन की चक्रव्यूह रचना। - फोटो : संवाद
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महाभारत काल में पांडवों ने जिला हमीरपुर के विधानसभा क्षेत्र नादौन के तहत आते गांव राजनौण में अज्ञातवास के दौरान कुछ समय गुजारा था। अज्ञातवास के दौरान यहां सोलहसिंगी धार के नीचे वनखंडेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आज भी पांडवों द्वारा की गई चक्रव्यूह की रचना देखने को मिलती है। भारत में कुरुक्षेत्र के अलावा हमीरपुर के राजनौण में चक्रव्यूह रचना हुई थी। 
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- फोटो : संवाद
अर्जुन ने यहीं पर चक्रव्यूह रचना कर युद्ध में विजय हासिल करने का ज्ञान हासिल किया था। इसके अलावा पांडवों ने यहां पानी के लिए नौण (प्राकृतिक जलस्रोत), विशाल टियाले और एक अधूरे मंदिर का निर्माण भी करवाया। पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान देशभर में सैकड़ों मंदिरों का निर्माण करवाया था जिसमें से एक राजनौण में है।
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- फोटो : संवाद
इतिहासकारों का मानना है कि एक चक्रव्यूह कुरुक्षेत्र में है तथा दूसरा हमीरपुर जिला के राजनौण में स्थित है। इस पुरानी धरोहर का दीदार करने के लिए सैकड़ों लोग राजनौण पहुंचते हैं। मंदिर कमेटी के सदस्य बलविंद्र सिंह गुलेरिया का कहना है कि राजनौण का इतिहास पांडव काल से संबंधित है और इसके प्रमाण आज भी मौजूद हैं।

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- फोटो : संवाद
उन्होंने बताया कि जब अर्जुन ने यहां से चक्रव्यूह का ज्ञान लिया था तब इसे यहां एक पत्थर पर उकेरा था। जिसे आज भी देखा जा सकता है। नौण से निकलने वाला पानी इसी चक्रव्यूह से घूमकर बाहर निकलता था। लेकिन वर्तमान में इस नौण से जलशक्ति विभाग द्वारा आसपास के आधा दर्जन गांवों के लिए पेयजल सप्लाई मुहैया करवाई जाती है। नौण के भीतर पानी पूर्व की भांति अब बाहर नहीं निकलता है। जिस कारण पानी चक्रव्यूह तक नहीं पहुंच पाता। 
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- फोटो : संवाद
राजनौण में पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान अधूरे मंदिर का निर्माण भी किया गया। करीब छह फीट ऊंची दीवारें खड़ी थीं और मंदिर के उपर छत नहीं थी। लेकिन मौजूदा समय में मंदिर कमेटी और स्थानीय लोगों की मदद इस लक्ष्मी नारायण मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है।
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उन्होंने बताया कि यह ऐतिहासिक धरोहर अनदेखी के चलते विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी है। उन्होंने प्रदेश सरकार, भाषा एवं संस्कृति विभाग और पुरातत्व विभाग से मांग उठाई है कि ऐसी धरोहरों का जीर्णोद्धार किया जाए। यह ऐतिहासिक धरोहर धनेटा से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर ऊना जिला के उपमंडल बंगाणा रोड पर स्थित है।
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