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USFDA ने इन घटिया दवाइयों पर खडे़ किए सवाल, कहीं आप तो नहीं खा रहे

Mon, 19 Mar 2018 01:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्टेशन ने इन घटिया दवाओं पर सवाल खडे़ कर दिए हैं। कहीं आप तो नहीं खा रहे। यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्टेशन ने एक पत्र लिखा है। 
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फार्मा हब बन चुके हिमाचल प्रदेश में बनाई जा रहीं कुछ दवाओं पर अमेरिका की एक एजेंसी ने सवाल खडे़ कर दिए हैं। अमेरिका सरकार के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्टेशन (एफडीए) के मानकों पर ये दवाइयां खरी नहीं उतर पा रही हैं। बद्दी में जर्मनी मूल की कंपनी समेत कई अन्य फर्मों की दवाओं में भी खोट निकाले गए हैं।
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कहीं लैब में गड़बड़ी है तो कहीं ग्रेडिंग में भी ये दवाएं खरी नहीं उतर पा रही हैं। इससे दवाओं का निर्यात प्रभावित हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताते हैं कि देश में हर तीसरी दवा हिमाचल में ही बनती है। इनमें से विदेशों के लिए भी दवा का काफी निर्यात होता है।

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बद्दी में कैंसर की दवा बनाने वाली जर्मनी मूल की एक कंपनी को यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्टेशन ने एक पत्र लिखा है। ये पत्र जर्मनी के ही बाड होमबर्ग स्थित कार्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को ही लिखा गया है।
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इसमें लिखा गया है कि यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्टेशन ने इस कंपनी की बद्दी स्थित यूनिट की दवा निर्माण सुविधाओं की जांच की है। ये जांच पिछले साल अप्रैल महीने में की गई। इसमें वस्तु निर्माण के कई नियमों की पालना नहीं की जा रही है।
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कई तरह की अनियमितताएं इस निरीक्षण में सामने आई हैं। फेडरल फूड, ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत ये दवा निर्माण खरा नहीं उतर पा रहा है। इसमें ये भी हवाला दिया गया है कि इस कंपनी का एक एनालिस्ट स्टेरिलिटी टेस्ट नमूनों को लेने में फेल साबित हुआ है। दवाओं की ग्रेडिंग के तरीके पर भी यूएस की इस एजेंसी ने सवाल खड़े किए हैं।
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राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मरवाह ने कहा कि विदेशी एजेंसियां अपने स्तर पर इस तरह की जांच करती हैं। ये एजेंसियां खुद ही कंपनियों से संपर्क कर उनकी खामियों की जानकारी देती है। कई बार भारत सरकार से संबंधित एजेंसी को भी इसकी सूचना देती हैं। केंद्रीय एजेंसी भी अपने स्तर पर कार्रवाई करती है। अभी तक यह मामला हमारे ध्यान में नहीं आया है। अगर आता है तो कार्रवाई की जा सकती है।
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हिमाचल प्रदेश के बद्दी और अन्य क्षेत्रों में दवा निर्माता फर्मों में पिछले छह महीने में दवाइयों के 40 से ज्यादा सैंपल फेल हो चुके हैं। दवाओं के सब स्टैंडर्ड पाए जाने पर कई कंपनियों के लाइसेंस भी रद्द किए गए हैं।
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