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Ahoi Ashtami 2021: संतान की तरक्की के लिए अहोई अष्टमी पर करें ये उपाय, जानें पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त

Tue, 26 Oct 2021 02:33 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

 अहोई अष्टमी भी एक ऐसा पर्व है जिसमें माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और जीवन में सफलता प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं।  हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। इसमें मां पार्वती की अहोई देवी के रूप में पूजा-उपासना होती हैं। इस वर्ष अहोई अष्टमी 28 अक्तूबर को है 
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अहोई अष्टमी
हिंदू धर्म में संतान की मंगलकामना, सुख, समृद्धि, वैभव और तरक्की के महिलाएं सालभर में कई उपवास-व्रत रखती हैं। अहोई अष्टमी भी एक ऐसा पर्व है जिसमें माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और जीवन में सफलता प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। इसमें मां पार्वती की अहोई देवी के रूप में पूजा-उपासना होती हैं। इस वर्ष अहोई अष्टमी 28 अक्तूबर को है।

शिमला के आचार्य तारादत्त शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार करवाचौथ पर महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं, वैसे ही अहोई अष्टमी पर माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और जीवन में सफलता प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। उन्होंने कहा कि इस साल अहोई अष्टमी बहुत ही शुभ संयोग और मुहूर्त में मनाया जाएगा। 28 अक्तूबर को गुरु-पुष्य नक्षत्र का योग भी बन रहा है इसके अलावा इस दिन पर सर्वार्थसिद्धि योग भी है।
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आचार्य तारादत्त शर्मा - फोटो : अमर उजाला
ऐसे में अहोई अष्टमी पर शुभ मुहूर्त में पूजा करना बहुत ही शुभ रहेगा। 28 अक्तूबर को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट से अष्टमी तिथि आरंभ हो जाएगी जो 29 अक्तूबर की दोपहर 02 बजकर 10 मिनट तक रहेगी।  अहोई अष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त 28 अक्तूबर को शाम 05 बजकर 40 मिनट से शाम 06 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।
 
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अहोई अष्टमी पर पूरे दिन निर्जला व्रत रखते हुए भजन-कीर्तन और मंत्र का जाप करें। शाम के समय पूजा मुहूर्त से पहले सभी तरह के पूजन सामग्री को एकत्रकर पूजा आरंभ करनी चाहिए। पूजा स्थान की साफ-सफाई करके दीवार पर अहोई माता की तस्वीर लगाएं।

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पूजा पाठ व्रत नियम - फोटो : istock
इसके बाद माता पार्वती और भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित करें। अहोई माता की तस्वीर को रोली,चावल, फूल और गंगाजल से पूजन करें। पूजन के बाद माताएं अहोई माता की आरती और कथा सुनें और अंत में अपने बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त करते हुए व्रत का पारण करें।
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पूजा पाठ - फोटो : istock
अहोई अष्टमी का महत्व
कार्तिक माह में अहोई अष्टमी व्रत का विशेष महत्व होता है। इसमें माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा अर्चना करती हैं। अहोई अष्टमी का व्रत भी निर्जला व्रत होता है। इसमें माताएं दिन भर उपवास करते हुए पूजा-पाठ करती हैं। महिलाएं इस दिन अपनी संतान की दीर्घायु और सुखी जीवन के लिए उपवास करती हैं। साथ ही अहोई देवी की पूजा करती हैं।
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