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OMG! 547 साल पुरानी ममी जिसके नाखून और बाल आज भी बढ़ रहे हैं

Sat, 03 Jun 2017 03:06 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, शिमला
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करीब 547 वर्ष पुरानी इस ममी की ईश्वर समझकर लोग पूजा करते हैं। लोग इसे जिंदा भगवान मानते हैं। हैरानी इस बात की है कि ममी के नाखून और बाल अभी भी बढ़ रहे हैं।
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भारत तिब्बत सीमा पर हिमाचल के जिला लाहौल स्पीति के गयू गांव में 547 वर्ष पुरानी 'ममी' को देखने के लिए देश विदेश से सैलानी पहुंचते हैं। यहां के लोग इसकी पूरी श्रद्धा से पूजा करते हैं।
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mummy
लाहौल स्पीति की ऐतिहासिक ताबो मोनेस्ट्री से लगभग 50 किमी दूर भारत-चीन सीमा पर स्थित गयू नाम का यह गांव साल में 6-8 महीने बर्फ से ढके रहने की वजह से दुनिया से कटा रहता है। मगर इस ममी की खासियतों की वजह से यहां दुनिया भर से सैलानी पहुंचते हैं। यहां के लोगों की इस ममी के प्रति अगाध श्रद्धा है।

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यह ममी तिब्बत से गियु गाँव में आकर तपस्या करने वाले लामा सांगला तेनजिंग की है, जो साधना में लीन होते हुए अपने प्राण त्याग बैठे थे। तेनजिंग बैठी हुई अवस्था में थे।
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उस समय उनकी उम्र मात्र 45 साल थी। दुनिया में यह एकमात्र ममी है जो बैठी हुई अवस्था में है। मिश्र की ममी दुनिया भर में मशहूर है।
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इस ममी की वैज्ञानिक जाँच में इसकी उम्र 547 वर्ष पायी गयी है। ममी बनाने में एक खास किस्म का लेप मृत शरीर पर लगाया जाता है लेकिन इस ममी पर किसी किस्म का लेप नहीं लगाया है।
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मगर हैरान करने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि स्‍थानीय लोगों के अनुसार इस ममी के बाल और नाखून आज भी बढ़ते रहते हैं। हालांकि इसको लेकर मतभेद हैं और पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं। लोग इसे आज जिंदा भगवान मानते हैं और इसकी पूजा करते हैं। 

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सन 1974 में यहाँ आये भूकम्प में यह ममी जमीन में दफ़न हो गयी थी। सन 1995 में आई टी बी पी के जवानों ने सड़क बनाते समय खुदाई में यह ममी पुन: प्राप्त हुई। हैरानी इस बात की है कि खुदाई के समय इस ममी के सिर में कुदाल लगने से खून निकल आया था, जो कि सामान्य तौर पर संभव नहीं है।

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ममी पर इस ताजा निशान को आज भी देखा जा सकता है। 2009 तक यह ममी ITBP के कैम्पस में रखी हुई थी। गाँव वालों ने ममी देखने के लिए आने वाली बाहरी लोगों की भीड़ देखकर ममी को अपने गाँव में स्थापित कर लिया।

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पेनसेल्वेनिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ता विक्टर मैर के अनुसार गयू में स्थापित ममी लगभग 547 वर्ष पुरानी है। सैंकड़ों वर्ष पहले बौद्ध भिक्षुओं का व्यापार के सिलसिले में भारत और तिब्बत के मध्य आना जाना था। उस समय एक बौद्ध भिक्षु सांगला तेनजिंग यहां मेडिटेशन की मुद्रा में बैठे और फिर उठे ही नहीं। उस समय ही इनके शरीर को एक स्तूप में संभाल कर रख लिया गया था।
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हालांकि ममी बनाने में एक खास किस्म का लेप मृत शरीर पर लगाया जाता है लेकिन इस ममी पर किसी किस्म का लेप नहीं लगाया है फ़िर भी इतने वर्षों से यह ममी कैसे सुरक्षित है? गयू गांव पहुंचने के लिए आप शिमला और मनाली दोनों जगहों से जा सकते हैं। 
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