सांकेतिक तस्वीर
जब आया मुश्किल दौर
2013 में एक राज्य स्तर के मुकाबले के दौरान सोनम के दाएं हाथ ने काम करना बंद कर दिया। उनके पिता और कोच को पहले लगा कि ये एक हल्की-फुल्की चोट है। सोनम के मुताबिक़, "हमने कुछ देसी इलाज किया। लेकिन हाथ धीरे-धीरे साथ छोड़ता जा रहा था और एक दिन हाथ ने काम ही करना बंद कर दिया।" जब रोहतक में एक स्पेशलिस्ट को हाथ दिखाया तो उसने सोनम को कुश्ती को भूल जाने को कहा। ये वो वक्त था जब पिता राजेंदर को भी लगने लगा कि उन्होंने अपनी बेटी को कुश्ती खिलवाकर गलती की है।
आस-पड़ोस के लोग ताने कसने लगे कि अब सोनम को कौन अपनाएगा।
राजेंदर बताते हैं, "लेकिन करीब दस महीने चले इलाज के दौरान हमने ग्राउंड को नहीं छोड़ा। सोनम हाथ के बजाए पैरों की प्रैक्टिस करती रही क्योंकि कुश्ती में पैरों का रोल भी बहुत बड़ा होता है। वो किसी भी कीमत पर ग्राउंड नहीं छोड़ना चाहती थी। दस महीने चले इलाज में डॉक्टर ने सोनम को दोबारा फिट कर दिया जिसके बाद फिर सोनम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।" सोनम आज भी कोच अजमेर मलिक की ये बात याद करती हैं कि "चोट पहलवानी का श्रंगार है और उससे घबराना नहीं चाहिए।"