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अब मिलिए भारत की उन शाही महिलाओं से, जो सहेज रही हैं देश की परंपरागत कला और शिल्प

Thu, 29 May 2025 06:49 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Indian Royal Women Reviving India's Traditional Art आज की ये शाही महिलाएं दिखा रही हैं कि विरासत सिर्फ वंश नहीं, बल्कि योगदान और प्रभाव से जुड़ी होती है। आइए जानें, कैसे ये महिलाएं ग्रामीण कारीगरों को सशक्त बना रही हैं और भारत की खोती जा रही सांस्कृतिक धरोहर को विश्वपटल पर पहुंचा रही हैं।
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ये शाही महिलाएं संभाल रहीं संस्कृति और सभ्यता - फोटो : Instagram
जब पॉप कल्चर और सोशल मीडिया पर फिल्मी सितारे और काल्पनिक किरदार छाए रहते हैं, तब भारत के असली ‘रॉयल्स’ यानी पूर्व राजघरानों की महिलाएं एक शांत लेकिन प्रभावशाली क्रांति लाने का प्रयास करती हैं। ये महिलाएं न तो शासन की चाह रखती हैं और न ही शानो-शौकत में खोई हैं, बल्कि इनका मिशन है भारत की पारंपरिक कला और शिल्प को पुनर्जीवित करना। आज की ये शाही महिलाएं दिखा रही हैं कि विरासत सिर्फ वंश नहीं, बल्कि योगदान और प्रभाव से जुड़ी होती है। आइए जानें, कैसे ये महिलाएं ग्रामीण कारीगरों को सशक्त बना रही हैं और भारत की खोती जा रही सांस्कृतिक धरोहर को विश्वपटल पर पहुंचा रही हैं।
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ओडिशा के मयूरभंज की राजकुमारी अक्षिता - फोटो : Instagram/abhanjdeo/
मयूरभंज की राजकुमारी अक्षिता भांज देव 

ओडिशा की राजकुमारी अक्षिता भांज देव ने अपने पूर्वजों के बेलगड़िया महल को पुनर्स्थापित कर एक बुटीक होटल में तब्दील किया है। इस होटल की आय से मयूरभंज फाउंडेशन संचालित होता है, जो छऊ नृत्य, ढोकरा कला, सबाई घास के उत्पाद और प्राचीन हथकरघा तकनीकों को फिर से जीवित कर रहा है। उनका उद्देश्य न सिर्फ कला को संरक्षित करना है, बल्कि कलाकारों को आर्थिक आत्मनिर्भरता भी दिलाना है।
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युवरानी मीनल झाला - फोटो : Instagram/meenaljhalasinghdeo
धेनकनाल की युवरानी मीनल कुमारी सिंहदेव

युवरानी मीनल कुमारी ओडिशा की प्रसिद्ध पत्ताचित्र कला को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत कर रही हैं। उनके ब्रांड ‘मीनाकेतन’ के जरिए पारंपरिक कला को आधुनिक डिज़ाइनों से जोड़ा गया है। वह स्थानीय कलाकारों को प्रशिक्षित कर रही हैं और इस कला को बाजार में लाभकारी बना रही हैं। इससे न केवल कला को नया जीवन मिला है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को रोज़गार का साधन भी मिला है।

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कांगड़ा की रानी शैलजा - फोटो : Instagram
कांगड़ा की रानी शैलजा कटोच 

हिमाचल की कटोच रॉयल फैमिली कांगड़ा की प्राचीन चित्रकला को फिर से जीवंत करने के लिए स्थानीय कलाकारों के साथ कार्य कर रही है। रानी शैलजा कटोच ने न सिर्फ कांगड़ा पेंटिंग को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया है, बल्कि वह ‘कांगड़ी धाम’ पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना चाहती हैं।
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राजकुमारी नंदिनी सिंह - फोटो : instagram
झाबुआ की राजकुमारी नंदिनी सिंह

मध्य प्रदेश के झाबुआ की राजकुमारी नंदिनी सिंह ने गोंड और भील आदिवासी कला को दुनिया के सामने लाने का संकल्प लिया है। वह व्यक्तिगत शोकेस और क्यूरेटेड एक्जीबिशन के माध्यम से इन कलाओं को जागरूक और सजग कलेक्टरों तक पहुंचा रही हैं। उनकी कोशिशों से इन आदिवासी कलाकारों को मंच और सम्मान दोनों मिल रहा है।
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