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FGM 2023: आज है महिला जननांग विकृति के लिए शून्य सहनशीलता दिवस, जानें इस दिन का इतिहास और महत्व जानें

Mon, 06 Feb 2023 11:27 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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यूनिसेफ एफजीएम - फोटो : Istock
International Day of Zero Tolerance for Female Genital Mutilation 2023 : हर साल फरवरी माह में महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य महिला जननांग विकृति को जड़ से खत्म करना और महिलाओं को सम्मान दिलाना है। पहली बार इस दिन को वर्ष 2003 में मनाया गया था। तब से प्रतिवर्ष महिलाओं को स्नेह और सम्मान दिलाने के लिए विश्व के कई देश महिला जननांग विकृति के लिए शून्य सहनशीलता दिवस मना रहा है। आज भी दुनिया के कई देशों में यह कुप्रथा जाती है। जिसमें अफ्रीका में इसके सबसे अधिक मामले देखने को मिलते हैं। इस दिन की शुरुआत के साथ यह निर्धारित किया गया है कि वर्ष 2030 तक महिला जननांग विकृति कुप्रथा को खत्म कर दिया जाएगा। आइए जानते हैं महिला जननांग विकृति के लिए शून्य सहनशीलता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस का इतिहास और महत्व।
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यूनिसेफ एफजीएम 2023 - फोटो : unicef india
कब मनाया जाता है महिला जननांग विकृति संबंधित यह दिवस?

महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस प्रतिवर्ष 6 फरवरी को मनाया जाता है। इस दिन को पहली बार 6 फरवरी 2003 को मनाया गया था।
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यूनिसेफ एफजीएम - फोटो : unicef india
महिला जननांग विकृति के खिलाफ सहनशीलता दिवस का इतिहास

इस दिन को नाइजीरिया की पूर्व राष्ट्रपति स्टेला ओबसंजो ने की थी। वह महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता चलाने वाले अभियान की प्रवक्ता भी थीं। नाइजीरिया की पूर्व राष्ट्रपति स्टेला ने ही वर्ष 2003 में 6 फरवरी को पहली बार यह दिन मनाने की घोषणा की थी। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इस दिन को स्वीकार कर लिया।

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यूनिसेफ एफजीएम - फोटो : unicef india
यूनिसेफ चला रहा अभियान

संयुक्त राष्ट जनसंख्या कोष और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने साल 2007 में महिला विकृति उत्पीड़न के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया। बाद में वर्ष 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पारित करके 6 फरवरी को महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाने की घोषणा की।
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यूनिसेफ एफजीएम - फोटो : unicef india
महिला जननांग विकृति के खिलाफ सहनशीलता दिवस का महत्व

सदियों से महिलाओं के खिलाफ कई कुप्रथाएं चली आ रही हैं। महिलाओं की मानसिक और शारीरिक सेहत पर यह बुरा असर करती हैं। साथ ही उनकी सामाजिक स्थिति के लिए भी नुकसानदायक हैं। इन कुप्रथाओं को खत्म करके महिलाओं को समाज में समान अधिकार और सम्मान दिलाने की जरूरत है। महिलाएं पुरुषों के समान ही हैं। इसलिए उन्हें पुरुषों जैसा सम्मान दिया जाना चाहिए। दुनियाभर में महिलाओं के खिलाफ फैली इन कुरीतियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए इस तरह के खास दिवस को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है।
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महिला जननांग विकृति - फोटो : istock
क्या है महिला जननांग विकृति?

महिला जननांग विकृति (एफजीएम) आंशिक या पूरी तरह से महिला जननांग अंगों को हटाने की प्रक्रिया या गैर चिकित्सीय कारणों से महिला जननांग अंगों को चोट पहुंचाने की प्रक्रिया को संदर्भित करता है।
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यूनिसेफ एफजीएम - फोटो : UNICEF
एफजीएम का आंकड़ा

मानवाधिकार उल्लंघन के तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त होने के बावजूद, तीन महाद्वीपों के 31 देशों में कम से कम 200 मिलियन लड़कियों और महिलाएं जननांग विकृति से पीड़ित हैं। इनमें आधे से ज्यादा पीड़ित मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया में रहते हैं।
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यूनिसेफ - फोटो : UNICEF
15 साल से कम उम्र की लड़कियां एफजीएम का शिकार

यूएनएफपीए के मुताबिक सालाना 4 मिलियन से अधिक लड़कियों को एफजीएम से गुजरने का खतरा होता है। लेकिन चूंकि कोरोना काल में स्कूल बंद हो गए। इस कारण लड़कियों को इस हानिकारक अभ्यास से बचाने वाले कार्यक्रमों बाधित हो गए। ऐसे में आने वाले वर्षों में एफजीएम की स्थिति अधिक फैलने की संभावना है। 15 वर्ष की आयु से पहले ही ज्यादातर लड़कियों का एफजीएम का खतरा रहता है।
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