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Independence Day 2023: आजादी के लिए इन सशक्त महिलाओं ने छोड़ दिया था सुख सुविधाओं का जीवन

Sat, 12 Aug 2023 06:27 PM IST
मेघा कुमारी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Independence Day Feature Stories: करीब 200 साल तक अंग्रेजों की गुलामी करने के बाद भारत को 15 अगस्त, 1947 के दिन आजादी मिली। ये आजादी कई जंग व त्याग के बाद हमारे हाथ लगी।
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freedom fighters - फोटो : istock
Independence Day Feature Stories: करीब 200 साल तक अंग्रेजों की गुलामी करने के बाद भारत को 15 अगस्त, 1947 के दिन आजादी मिली। ये आजादी कई जंग व त्याग के बाद हमारे हाथ लगी। स्वतंत्रता की इस लड़ाई में जहां पुरुषों ने खून पसीना एक किया था, वहीं महिलाओं ने भी अलग इतिहास रचा था। जब महिलाएं घूंघट में रहकर काम करती थी उस जमाने में कुछ महिलाओं ने अंग्रेजों के हाथ से लोहा लिया था। खास बात ये है कि, जब देश आर्थिक समस्याएं से जूंझ रहा था तब कुछ महिलाओं ने अपनी ऐशोआराम की जिंदगी को त्याग कर आजादी की जंग लड़ी थी। आज भारत आजादी के 76 साल पूरे होने के जश्न में झूम रहा है। बच्चा बच्चा आजादी के रंग में रंगा है। हम हर साल स्वतंत्रता दिवस मनाते है। ये अवसर उन सेनानियों को याद करने के लिए है, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान को न्योछावर कर दिया था। इस आजादी में महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान रहा है। स्वतंत्रता दिवस की इस 76वीं वर्षगांठ के खास अवसर पर हम उन महिलाओं के बारे में जानेंगे जिन्होंने देश के लिए सुख सुविधाओं को त्याग आंदोलन में खुद को समर्पित कर दिया था।
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झांसी की रानी - फोटो : facebook
झांसी की रानी 
झांसी की रानी लक्ष्मी बाई का नाम भला कौन नहीं जानता? यह देश की पहली महिला क्रांतिकारी थी। ये एक क्रांतिकारी मां भी थी इन्होंने अपने बेटे की रक्षा के लिए अंग्रेजों से आखिरी सांस तक लड़ाई की थी। पीठ पर बच्चे को टांगे हाथ में तलवार लिए सैकड़ों अंग्रेज सैनिकों से लड़ने वाली ये पहली महिला थी। खास बात ये थी कि, रानी लक्ष्मीबाई महाराष्ट्रीयन कराडे ब्राह्मण परिवार की थी। ऐसे में जहां लोग खाने को तरस रहे थे रानी लक्ष्मीबाई ने ऐशोआराम को त्याग अंग्रेजों को मात देने के लिए मैदान में उतर गई थी।
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कस्तूरबा गांधी - फोटो : SELF
कस्तूरबा गांधी 
देश को आजादी दिलाने के लिए जहां महात्मा गांधी ने खून पसीना एक कर दिया था वहीं, कस्तूरबा गांधी भी इस जंग के अंत तक बनी रही। वह महात्मा गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आजादी के इस संग्राम में कूद पड़ी थी। एक संपन्न परिवार की बेटी रही कस्तूरबा गांधी ने विलासिता का जीवन छोड़ महात्मा गांधी के साथ आश्रम में रहने आ गई और अपने कामों से हर देशवासी की 'बा' बन गईं। 

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सरोजिनी नायडू
सरोजिनी नायडू
अपना अलग इतिहास रचने वाली सरोजिनी नायडू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष बनीं। उन्होंने समाज में महिलाओं को जागरूक करने के लिए कई अभियान चलाएं। सरोजिनी नायडू न केवल राजनीति में अपनी पहचान बनाई बल्कि यह एक अच्छी लेखक भी थी। इन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में अपना कैसर-ए-हिंद सम्मान लौटा दिया था। 
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दुर्गा भाभी - फोटो : Faceebook/VPOI13
दुर्गावती देवी 
दुर्गावती देवी को दुर्गा भाभी के नाम से भी जाना जाता है। दुर्गावती देवी आजादी की हर आक्रमक योजना का हिस्सा बनी। खास बात ये है कि, उस समय जब हमारे पास संसाधन कम थे तब इन्होंने बम बनाना सीखा था। इन्हें आयरन लेडी भी कहा जाता था। दुर्गावती देवी आंदोलन में जाने वाली सभी लोगों का तिलक कर उनकी जीत की कामना करती थी।
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विजयालक्ष्मी पंडित - फोटो : Facebook
विजयालक्ष्मी पंडित 
कुलीन परिवार से ताल्लुक रखने वाली विजयालक्ष्मी पंडित किसी अलग पहचान की मोहताज नहीं है। वह जवाहर लाल नेहरू की बहन थीं, लेकिन देश की आजादी के लिए वह भी स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़ीं। इस बीच उन्हें जेल भी जाना पड़ा लेकिन वह अंत तक आंदोलन में डटी रही।
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