ईडाणा माता
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माताजी के अग्नि स्नान के दौरान मंदिर में चढ़ाए गए चुनरी व अन्य चढ़ावा, माला, माली आदि जलकर राख हो जाते हैं। लेकिन अग्नि स्नान के बाजवूद माता प्रतिमा को जरा भी नुकसान नहीं होता है। बल्कि अग्नि स्नान के बाद माता की प्रतिमा और भी अधिक निखर कर सामने आती है।