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Khatu Shyam Mandir: राजस्थान में क्यों लगता है खाटूश्याम का फाल्गुन लक्खी मेला? बस एक नजर में इतिहास जान लीजिए

Fri, 28 Feb 2025 05:26 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सीकर

सार

Khatu Shyam Falgun Lakkhi Fair: खाटूश्याम जी का प्रसिद्ध फाल्गुन लक्खी मेला इस वर्ष 28 फरवरी 2025 से शुरू होकर 11 मार्च 2025 तक चलेगा। हर साल फाल्गुन मास में इस मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले को दौरान लाखों श्रद्धालु बाबा खाटूश्याम के दर्शन के लिए आते हैं।
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बाबा खाटूश्याम मेला - फोटो : अमर उजाला
खाटूश्यामजी फाल्गुन लक्खी मेला और निशान यात्रा राजस्थान के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। राजस्थान में सीकर जिले के दांतारामगढ़ उपखंड के खाटू कस्बे में वर्ष 2025 का खाटू मेला 28 फरवरी से शुरू होकर 12 दिन तक भरेगा। इस बार के खाटू मेला 2025 में VIP दर्शनों पर रोक रहेगी। खाटूश्यामजी मेले के मौके पर आइए जानते हैं सीकर के खाटू कस्बे में ही क्यों भरता है बाबा श्याम का फाल्गुन लक्खी मेला। खाटू मेले का महत्व और खाटू मेले से जुड़ी कुछ रोचक बातें।
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बाबा खाटूश्याम - फोटो : अमर उजाला
कौन हैं बर्बरीक जो बने बाबा श्याम
खाटूश्यामजी को पहले बर्बरीक के नाम से जाना जाता था। बर्बरीक से खाटूश्यामजी बनने के पीछे कई दशकों से प्रचलित कथा महाभारत काल की बताई जाती है। किंवदंती है कि भीम के बेटे घटोत्कच और दैत्य मूर की बेटी मोरवी के पुत्र बर्बरीक ने अपनी मां से वादा किया था कि वो महाभारत के युद्ध में कमजोर पक्ष का साथ देंगे। उन्होंने कौरवों के लिए लड़ने का फैसला किया। 
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श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
भगवान श्रीकृष्ण जानते थे कि अगर बर्बरीक कौरवों का साथ देंगे तो पांडवों की हार तय है। ऐसे में श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से दान में उसका सिर मांग लिया। उन्होंने तुरंत अपना शीश दान कर दिया। बर्बरीक के इस बलिदान से प्रभावित होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि वे कलयुग में उनके नाम 'श्याम' से पूजे जाएंगे।

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श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
खाटूश्यामजी में ही क्यों पूजे जाते हैं बर्बरीक
प्रचलित कथा के अनुसार महाभारत युद्ध के दौरान कटा बर्बरीक का शीश राजस्थान के सीकर जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित छोटे से कस्बे खाटू में दफनाया गया। एक गाय उस स्थान पर आकर रोजाना अपने स्तनों से दूध की धारा स्वत: ही बहाती थी। बाद में खुदाई के बाद वहां एक शीश प्रकट हुआ, जिसे कुछ दिनों के लिए एक ब्राह्मण को सूपुर्द कर दिया गया। एक बार खाटू नगर के राजा को स्वप्न में मन्दिर निर्माण के लिए और वह शीश मन्दिर में सुशोभित करने के लिए प्रेरित किया गया। तब उस स्थान पर मन्दिर का निर्माण किया गया। 
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बाबा खाटूश्याम - फोटो : अमर उजाला
कार्तिक माह की एकादशी को शीश मन्दिर में सुशोभित किया गया। इस दिन बाबा श्याम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। मूल मंदिर 1027 ई. में रूप सिंह चौहान और उनकी पत्नी नर्मदा कंवर द्वारा बनाया गया था। खाटू कस्बे में बर्बरीक की पूजा श्याम नाम से होने के कारण इस जगह को खाटूश्यामजी भी कहा जाने लगा।
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श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
देश भर से पहुंचते हैं लाखों श्याम भक्त
खाटूश्यामजी के वार्षिक मेले में देशभर से श्याम भक्तों का सैलाब उमड़ता है। भक्त शीश के दानी से दरबार में सिर झुकाकर परिवार की सुख समृद्धि की कामना करते हैं। बाबा श्याम की एक झलक पाने के लिए श्याम भक्तों लंबी लंबी कतारों में कई घंटों तक खड़े रहते हैं। फाल्गुन माह में भरने वाले लक्खी मेले में तो खाटूश्यामजी में पग-पग पर सिर्फ श्याम दीवाने ही नजर आते हैं।
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श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
क्या है बाबा श्याम की निशान यात्रा
श्याम भक्तों की निशान और पद यात्राएं सालभर जारी रहती हैं। यूं तो अमूमन खाटूश्यामजी से पहले रींगस कस्बे में ही पद यात्राएं शुरू होती हैं, मगर फाल्गुन मेले के मौके पर लोग अपने घरों से ही कई किलोमीटर का सफर पैदल ही तय करके खाटूश्यामजी पहुंचते हैं। मान्यता है कि बाबा श्याम के दरबार में केसरिया रंग का यह निशान चढ़ाने से हर मनोकामना पूरी होती है। फाल्गुन मेले के दौरान लाखों निशान बाबा श्याम को चढ़ाए जाते हैं।

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महिला श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
क्या है श्याम कुंड, क्यों लगाते हैं इसमें डुबकी
फाल्गुन मेला के दौरान श्याम कुंड में डुबकी लगाना अत्यधिक शुभ माना जाता है। खाटू स्थित श्याम कुंड वाली जगह पर ही बर्बरीक का शीश पहली बार प्रकट हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि श्याम कुंड में स्नान करने से भक्तों में सकारात्क ऊर्जा का संचार होता है। वह बीमारियों और व्याधियों से मुक्त हो जाता है। इसलिए बड़ी संख्या में फाल्गुन मेले के दौरान भक्त श्याम कुंड में स्नान करते हैं।

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बाबा का इतिहास - फोटो : अमर उजाला
एक पल के दीदार के लिए 37 किलोमीटर की पद यात्रा
सीकर जिले के खाटूश्यामजी कस्बे में बाबा श्याम के वार्षिक फाल्गुनी लक्खी मेले की भव्य तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है। बाबा श्याम का निज मंदिर दुल्हन की तरह सज कर तैयार हुआ है, जिसमें 200 बंगाली कारीगरों ने रात-दिन मेहनत करके मंदिर की सजावट को अंतिम रूप दिया है। मेले की भव्यता बढ़ाने के लिए वीर बर्बरीक की शेरों के साथ बाल लीलाओं के आकर्षक श्रृंगार के दर्शन किए जा सकेंगे। मंदिर में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को गीता उपदेश देना, श्रीराम, सरस्वती, नीले घोड़े पर सवार वीर बर्बरीक, तीन बाण और कृष्ण संग गोपियों की मनमोहक रास लीलाओं का दृश्य देखने को मिलेगा।

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मूर्ति - फोटो : अमर उजाला
आज से 12 दिवसीय वार्षिक लक्खी मेले का शुभारंभ हो गया है, जिसमें देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु बाबा श्याम के दर्शन के लिए मेले में सैलाब उमड़ेंगे। प्रशासन और श्याम मंदिर कमेटी ने मेले के सफल आयोजन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं, जिससे भक्तों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। बाबा श्याम के वार्षिक लक्खी मेला जिला प्रशासन की निगरानी में तमाम व्यवस्थाएं श्री श्याम मंदिर कमेटी द्वारा की गई हैं।

प्रशासन ने महाकुंभ में बढ़ती भीड़ और संभावित अव्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए रींगस से खाटूश्यामजी मंदिर तक दर्शन व्यवस्थाओं में चारण मेला मैदान में दो ब्लॉक ओर बढ़ा कर छः जिगजैग बनाए जा रहे। अब श्रद्धालुओं को रींगस से श्याम मंदिर तक लगभग 37 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी।

श्रद्धालु अब रींगस से खाटू धाम पहुंचने के बाद रींगस रोड़ डायवर्जन से सहायक अभियंता कार्यालय विद्युत विभाग के सामने से कैरपुरा तिराहा, चारणों की ढाणी होते हुए चारण मेला मैदान में प्रवेश करेंगे। यहां से 18 लाइनों में प्रवेश होकर तीन कतारों द्वारा छः ब्लॉकों में बने जिगजैग रास्ते से गुजरकर लखदातार मेला मैदान के 6 ब्लॉक से होकर 40 फुट चौड़े नए रास्ते से मुख्य मेला ग्राउंड 75 फुट चौड़े मुख्य मार्ग पर बनी 14 कतारों से होते हुए बाबा श्याम की चौखट पर पहुंच दर्शन कर सकेंगे।
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खाटू नरेश दरबार - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन का कहना है कि इस बार बढ़ती भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मार्ग में बदलाव किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन हो सकें। प्रशासन ने इस बार अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त व्यवस्था की है, जिससे भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। रास्ता लंबा होने से श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में अधिक समय लगेगा जिससे दर्शन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

हालांकि, प्रशासन का दावा है कि यह नई व्यवस्था श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। खाटूधाम में हर साल लाखों श्रद्धालु लक्खी मेले में आते हैं। इसलिये दांतारामगढ़ रोड़ से आने वाले श्रद्धालुओं क रूलानिया कृषि फार्म हाउस होते हुए कुमावत कृषि फार्म हाउस पर बने जिगजैग से होकर लगदातार मेला मैदान से होते हुए दर्शन के लिए भेजा जाएगा।
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