पेड़ की पत्तियां ले जाती महिला
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स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से हर्बल गुलाल तैयार की जा रही है। इस बार तीन हजार किलो का लक्ष्य रखा था। लेकिन अत्यधिक मांग के चलते अभी तक 8000 किलो से ज्यादा गुलाल बनाई गई, जिससे करीब 36 लाख रुपये की बिक्री हुई। इससे महिलाओं को रोजगार के साथ आर्थिक संबल भी मिल रहा है। इससे खुशी मिलती है, इन्हें बाजार में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. सुमन अजमेरा, डीपीएम ग्रामीण आजीविका विकास परिषद, राजसमंद
अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्म पर एक हजार किलो भाव
समूह की ओर से तैयार की जा रही हर्बल गुलाल पिछले साल 300 रुपये किलो में उपलब्ध थी। जो इस साल 450 रुपये किलो हो गई है। जबकि जानकारों की माने तो अन्य कई ऑनलाइन प्लेटफार्म पर हर्बल गुलाल की कीमत एक हजार रुपये तक बताई जा रही है। जबकि उसकी कोई गारंटी नहीं होती। जिले के संचालित स्वयं सहायता समूह को बाजार उपलब्ध होने पर अच्छी आय हो सकती है।