मरुस्थल के संग्राम में मतदान होने में बस चंद घंटे ही बाकी हैं। इस बार सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस ने पूरी फौज उतार दी है। झालरापाटन में मानवेंद्र सिंह भाजपा को कड़ी चुनौती देते दिख रहे हैं। मुख्यमंत्री का किला फतह करने के लिए वह अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
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Manvendra Singh
- फोटो : facebook
राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की दूसरी सूची में 31वें नंबर पर दर्ज नाम था- मानवेंद्र सिंह, विधानसभा-झालरापाटन। सहसा यकीन नहीं हुआ। मालूम था कि मानवेंद्र जंग में लौटेंगे लेकिन उम्मीद बाड़मेर, जैसलमेर के आसपास की थी झालावाड़ के झालरापाटन की नहीं। भूगोल और राजनीति के भूगोल, दोनों में दिलचस्पी हो तो बाड़मेर से कुछ सात सौ किलोमीटर दूर ठहरता है झालावाड़। खबरों की मानें तो मानवेंद्र ने झालारापाटन में खुद को झोंक दिया है। वो बखूबी जानते हैं कि ये उनका इलाका नहीं है। ये उनकी जमीन नहीं है। लेकिन, जख्म जब गहरे हों तो लड़ने का हौसला मिल जाता है।
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Manvendra Singh
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मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र झालरापाटन के रण में रणविजय बनने के लिए पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह इन दिनों अपनी हड्डियां गला रहे हैं। वह खुद जनसंपर्क अभियानों का नेतृत्व कर लोगों से संवाद कर रहे हैं। इन दिनों वो झालरापाटन में 10 से 12 घंटे तक नुक्कड़ सभाएं करते, रैलियां करते मिल जाते हैं।
बीते दिनों कांग्रेस के प्रचार के लिए झालरापाटन पहुंचे सिद्धू ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा था कि भाजपा ने मानवेंद्र जैसे मणि को निकालकर फेंक दिया और कांग्रेस ने उन्हें सोने में जड़ दिया है।
करणी सेना ने मानवेंद्र के समर्थन का बाकायदा एलान कर दिया है। पद्मावत विवाद और आनंदपाल एनकाउंटर के बाद, वसुंधरा के खिलाफ राजपूतों की नाराजगी सबके सामने हैं। ये शायद राजस्थान के रण का सबसे नजदीक से देखा जाने वाला 'युद्ध' साबित होगा। राजस्थान में सात दिसंबर को रामगढ़ की सीट को छोड़कर 199 सीटों पर मतदान होगा। झालरापाटन के नतीजों पर दोनों पार्टियों के अलावा पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।