नृत्य करते हुए
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इस अवसर पर कैलाशचंद सोनी, भंवरलाल बज, संजय कटारिया, आनंद सोनी व अजय जैन ने अपने संबोधन में आचार्य विद्यासागर जी के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि आचार्य विद्यासागर जी एक दिव्य पुरुष थे, जिनके जीवन का हर हिस्सा समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। उनकी तप साधना एक मिसाल है, जो प्रकृति में सुगंध की तरह महक रही है। उन्होनें कहा कि मूकमाटी महाकाव्य जैसे 100 से अधिक अद्भुत ग्रंथों के रचयिता, 75 गौशालाओं, अनेक अस्पतालों व गुरुकुल विद्यालयों के प्रेरक आचार्यश्री एक वर्ग विशेष के ही नहीं, अपितु समूचे राष्ट्र के ऐसे पूजनीय संत थे, जिन्होंने अपने ज्ञान, संयम, तप, त्याग, आचरण व परोपकार से जन जन को प्रभावित व लाभान्वित किया। उन्होनें वैराग्य धारण करने के उपरांत पचास साल से अधिक की अपनी अनवरत साधना के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों में करीब 55 हजार किलोमीटर की पदयात्राएं कर श्रमण संस्कृति की धर्म पताका फहराई तथा देशभर में अहिंसा एवं सद्भावना का संदेश फैलाकर समाज व राष्ट्र को नई दिशा प्रदान की।
वक्ताओं ने अपराजेय साधना से देदीप्यमान आचार्य विद्यासागरजी के जीवन चरित का गुणगान करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाकर जीवन को सार्थक बनाने का आह्वान किया। प्रारम्भ में निदेशक अजय जैन, प्रधानाचार्य एस एन खंडेलवाल, उपप्रधानाचार्य कैलाशचंद शर्मा व विद्यालय के शिक्षकगणों ने अतिथियों का माल्यार्पण एवं साफा बांधकर स्वागत किया। कार्यक्रम का समापन आचार्य विद्यासागरजी महाराज की मंगल आरती से किया गया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक आजाद शर्मा ने किया।