शारदीय नवरात्र के पहले दिन, जोधपुर के मेहरानगढ़ किले स्थित चामुंडा माता मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। मां चामुंडा को जोधपुर के शासकों और स्थानीय निवासियों की कुलदेवी माना जाता है। कहा जाता है कि माता के आशीर्वाद से ही सन 1965 में पाकिस्तान के हमले के दौरान किले को कोई छू तक नहीं पाया था। माना जाता है कि यहां विराजने वाली मां चामुंडा अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। मां चामुंडा का यह मंदिर राव जोधा ने 1460 में बनवाया था, और नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
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मां चामुंडा मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला
गुरुवार को नवरात्रि का पहला दिन है। जोधपुर के मेहरानगढ़ किले स्थित मां चामुंडा के मंदिर में दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता आज सुबह से ही लगना शुरू हो गया। 9 दिन तक मां के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी। आज शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस नवरात्र को शुभ भी माना जाता है। कई लोग तो इस नवरात्र में शुभ कार्य भी करते हैं। यहां तक कि वहां मकान और अन्य नई वस्तुओं की खरीदारी भी की जाती है। इसी के चलते जोधपुर के मेहरानगढ़ स्थित मां चामुंडा माता मंदिर में भी आज से पूजा अर्चना शुरू हो गई।
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मां चामुंडा मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला
देशभर में प्रसिद्ध है मेहरानगढ़ किले की चामुंडा माता
सबसे बड़ी बात ये है कि पूरे राजस्थान में ही नहीं बल्कि देशभर में मां चामुंडा की मेहरानगढ़ किले में स्थित मूर्ति को काफी प्रभावशाली माना जाता है। माना जाता है कि यहां विराजने वाली मां चामुंडा अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। यही वजह है कि पाकिस्तान की ओर से बम बरसाए गए थे। तब कोई नुकसान इस शहर को नहीं कर पाए। वहीं ऐसी कई कथाएं भी प्रचलित हैं कि इस मेहरानगढ़ किले से पूरा पाकिस्तान दिखता है, जिसके इतिहास विशेषज्ञ सिर्फ भ्रामक बातें बताते हैं।
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मंदिर का ऊपर से लिया गया दृश्य।
- फोटो : अमर उजाला
पंख फैलाने वाली माता तू ही हमारी रक्षक
आद्यशक्ति मां चामुंडा की स्तुति में कहा गया है कि जोधपुर के किले पर पंख फैलाने वाली माता तू ही हमारी रक्षक है। मारवाड़ के राठौड़ वंशज चील को मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप मानते हैं। राव जोधा को चामुंडा माता में काफी श्रद्धा थी। चामुंडा माता जोधपुर के शासकों की कुलदेवी हैं। कहा जाता है कि माता कि कृपा से ही युद्ध के दौरान किले को भारत बचा पाया था। राव जोधा ने 1460 में मेहरानगढ़ किले के पास चामुंडा माता का मंदिर बनवाया और मूर्ति की स्थापना की।
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मंदिर में भक्तों की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
शासकों और निवासियों की कुलदेवी
बताया जाता है कि यह मूर्ति जोधपुर के मंडोर से लाकर इस किले में स्थापित की गई थी। चामुंडा मां मात्र शासकों की ही नहीं बल्कि अधिसंख्य जोधपुर निवासियों की कुलदेवी हैं। आज भी लाखों लोग इनको पूजते हैं। नवरात्र के दिनों में यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है। कहा जाता माता के आशीर्वाद से ही सन 1965 में पाकिस्तान के हमले के दौरान किले को कोई छू तक नहीं पाया था।
आंचल का कवच
सूर्यनगरी वासियों में चामुण्डा माता के प्रति अटूट आस्था यह भी है। वर्ष 1965 और 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान जोधपुर किले पर गिरे सैकड़ों बमों को मां चामुंडा ने जैसे अपने आंचल का कवच पहना दिया था। जोधपुर के विभिन्न जगहों पर बम गिराए गए, लेकिन पुरानी जेल और सरदार क्लब का कुछ हिस्सा ही क्षतिग्रस्त हुआ था। कोई जनहानि नहीं हुई थी। जोधपुर शहरवासी इसे आज भी मां चामुंडा की कृपा ही मानते हैं।