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Rajasthan: रात में बॉर्डर पार कराया, ईंट-भट्ठों पर काम दिलाया, बांग्लादेशियों की भारत में एंट्री की कहानी

Thu, 08 May 2025 08:31 AM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, झुंझुनूं

सार

Story of Bangladeshi Entry into India: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से सीमा पार कर भारत में प्रवेश कर रहे हैं। दलालों की मदद से तीन से पांच हजार रुपये में बॉर्डर पार करने और 150 रुपये में आधार कार्ड बनवाने का खुलासा हुआ है।
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पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिक - फोटो : अमर उजाला
गृह मंत्रालय और राज्य सरकार के निर्देश पर अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों के खिलाफ चलाए गए अभियान के तहत पकड़े गए बांग्लादेशियों से अहम खुलासे हुए हैं। बांग्लादेशी नागरिक अवैध तरीके से दलाल के जरिए रात के अंधेरे में बॉर्डर पार करने और बॉर्डर पार करवाने के लिए दलालों ने पैसे लिए। इसके बाद आधार कार्ड और पैन कार्ड भी बनवाकर मजदूरी पर लगाया।
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कैसे हुए भारत में एंट्री - फोटो : अमर उजाला
झुंझुनूं के मेघपुर गांव में सात बांग्लादेशी नागरिकों के पकड़े जाने के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसी अलर्ट हुईं। बांग्लादेशी नागरिकों के पकड़े जाने के बाद सीआईडी और पचेरी पुलिस की संयुक्त टीमों ने इलाके में सर्च अभियान शुरू किया। जानकारी के अनुसार, बांग्लादेशी नागरिकों के क्षेत्र में छिपे होने की आशंका को देखते हुए टीम ने नावता गांव स्थित एक ईंट-भट्ठे पर दबिश दी। पुलिस ने RK ईंट-भट्ठे पर 28 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा।

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जानकारी देते हुए बांग्लादेशी नागरिक - फोटो : अमर उजाला
बॉर्डर पार कराने वाले दलालों का है बड़ा नेटवर्क
पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों ने बताया कि दलालों का नेटवर्क बॉर्डर पार कराता है। नावता गांव के ईंट-भट्ठे पर पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों ने बताया कि उन्होंने दलाल मुकुंद और सफीक उल के जरिए बॉर्डर पार कर भारत में घुसे। पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों ने बताया कि दोनों दलाल वर्षों से बांग्लादेश से भारत में घुसपैठ करवाने वाले गिरोह का हिस्सा हैं। इन्होंने बताया कि दलाल हर व्यक्ति से बॉर्डर पार करवाने के लिए तीन से पांच हजार रुपये वसूलते हैं। दलाल रात के अंधेरे में नोदाबास जैसे सीमाई इलाकों से भारत में एंट्री दिलाते हैं।

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दलालों ने बनवाए फर्जी दस्तावेज - फोटो : अमर उजाला
150 रुपये में आधार कार्ड बनवाया 
इसके बाद किसी ने 50 तो किसी ने 150 रुपये में आधार कार्ड बनवाया। कुछ ने पैन कार्ड भी बनवा लिए, ये सिर्फ कुछ मजदूर नहीं हैं। यह पूरी एक सुरक्षा चूक की कहानी है। जब किसी विदेशी को भारत में आधार कार्ड मिल जाता है। पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों ने कबूल किया कि वे पिछले 10 साल से भारत में रह रहे थे, उन्हें अलग-अलग भट्ठों पर काम दिलवाया जाता रहा। इनके बच्चे भी यहीं जन्मे, इतने वर्षों तक किसी को भनक तक नहीं लगी, यह सिस्टम की सबसे बड़ी असफलता है।

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बांग्लादेशी नागरिकों को ले जाते हुए - फोटो : अमर उजाला
देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
यह मामला एक बार फिर भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है। दलालों का यह नेटवर्क न केवल अवैध घुसपैठ को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन रहा है। इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में भारत-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ को रोका जा सके।

...झुंझुनू से मोहम्मद जावेद की रिपोर्ट
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