शादी कार्ड
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न कुंकुमपत्री और न डिजिटल कॉर्ड बस अड़ोसी-पड़ोसियों, रिश्तेदारों और मेहमानों के लिए घर की दीवारों पर बनाए जाने वाली कलाकृति ही निमंत्रण का जरिया माना जाता है और इस अनूठी मनुहार से सभी शादी समारोह में खींचे चले आते हैं। जानकारों की मानें तो यह अनूठी परंपरा रियासतकाल से ही चली आ रही है। खासकर जैसलमेर के किला क्षेत्र में बसे सैंकड़ों घरों में एक खास जाति समुदाय में इसका प्रचलन ज्यादा देखा जाता है। हालांकि, घर के मुख्य द्वार की दीवारों पर चित्रात्मक आमंत्रण किसी एक जाति एवं समुदाय तक सीमित नहीं, इसे जैसलमेर के विभिन्न समाजों ने अपनाया और अपने-अपने आराध्य देवता एवं लोक-देवताओं के चित्रों का इस्तेमाल कर इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।