जयपुर में निकली गणगौर माता की शाही सवारी।
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गणगौर पर्व का महत्व क्या?
गणगौर पर्व माता पार्वती की तपस्या और शिव से पुनर्मिलन का प्रतीक है। लोक मान्यताओं के अनुसार, विवाह के बाद पार्वती होली के अवसर पर अपने मायके आईं और वहां 16 दिनों तक रहीं। इस दौरान उनकी सखियों ने उनके साथ खूब आनंद किया। विदाई के समय पार्वती ने सभी को अखंड सौभाग्य और सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद दिया। इसी प्रसंग को गणगौर उत्सव के रूप में मनाया जाता है। गणगौर केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर भी है। इस उत्सव में युवतियां और विवाहित महिलाएं पूरे 16 दिन तक पार्वती माता की आराधना करती हैं और मंगल गीत गाकर सौभाग्य एवं सुखद दांपत्य जीवन की प्रार्थना करती हैं। जयपुर और उदयपुर जैसे शहरों में गणगौर की शाही सवारी बड़े ही भव्य रूप में निकलती है, जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु और पर्यटक उमड़ते हैं।