बाल्टी में पानी लेकर जाता बच्चा
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तीन दिन में चार घड़े पानी, बाकी समय इंतजार
स्थानीय निवासी बताते हैं कि तीन दिन में मुश्किल से चार से छह घड़े पानी मिल पाता है। कई बार आधा किलोमीटर दूर से पानी ढोना पड़ता है। व्यवसायी पराग पोद्दार अपनी 250 साल पुरानी हवेली छोड़ने की तैयारी में हैं। ललित सोनी, जो चार साल पहले लाखों खर्च कर नया घर बनवाए थे, अब उस घर को बेचने को मजबूर हैं। गृहणी संतोष सैन बताती हैं कि घर में एक भी नल काम नहीं करता, सारा पानी टैंकर से आता है। इस कारण घर चलाना भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय निवासी जगदीश बोहरा कहते हैं कि पानी आने का कोई तय समय नहीं है। कभी सुबह, कभी दोपहर, कभी हफ्तों बाद। इससे बच्चों की पढ़ाई और बड़ों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
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वादे अधूरे, योजनाएं ठप
चारभुजा मोहल्ला, जोशियों की गली जैसे इलाकों में वर्षों पहले टंकी निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी थी, लेकिन आज तक काम शुरू नहीं हुआ। स्थानीय निवासी विजय व्यास का कहना है कि प्रशासन और पीएचईडी विभाग की लापरवाही से आज हालात यहां तक पहुंच गए हैं। कुछ वार्डों में पर्याप्त जलापूर्ति है, लेकिन इन दो-तीन वार्डों में हालत बद से बदतर है। नलों से पानी भले ही ना आए, लेकिन जलदाय विभाग हर महीने बिल जरूर भेजता है। लोगों का कहना है कि जब सप्लाई आती भी है तो दबाव इतना कम होता है कि चार घड़े भी नहीं भरते।