फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Interview: 'फिसल गए तो हर-हर गंगे', अयोध्या में फूट-फूटकर रोईं साध्वी ने ऐसा क्यों कहा? ज्ञानवापी पर यह बोलीं

Mon, 29 Jan 2024 07:21 PM IST
उदित दीक्षित आशीष कुलश्रेष्ठ

सार

फिसल गए तो हर-हर गंगे, अयोध्या में फूट-फूटकर रोईं साध्वी ऋतंभरा ने क्यों कहा; ज्ञानवापी पर ये बोलीं
विज्ञापन
1 of 3
साध्वी ऋतंभरा से खास बातचीत। - फोटो : अमर उजाला
अयोध्या राम मंदिर में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की। भगवान राम के आगमन पर वहां मौजूद साधु-संतों समेत हर श्रद्धालु की आंखें नम थीं। साध्वी ऋतंभरा मप्र की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के गले लगकर खूब रोईं। उनके भावुक होने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई। ऐसे में राम मंदिर और वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर को लेकर 'अमर उजाला' ने साध्वी  ऋतंभरा से खास बातचीत की। आइए, जानते हैं उन्होंने क्या कहा?  
विज्ञापन

2 of 3
उमा भारती के गले लगकर भावुक हुईं साध्वी ऋतंभरा। - फोटो : अमर उजाला
सवाल: अयोध्या में रामलला विराजमान हो गए हैं, लंबे इंतजार के बाद वो पल आपके लिए कितना कितना सुखद रहा है? 
जवाब:
जो हुआ वह बहुत सुखद है, मुझे आनंदित कर देने वाला है। हमारे बिखरे हुए स्वाभिमानों की प्रतिष्ठा हुई है। 1000 साल बाद हिंदू समाज ने अपने स्वाभिमान, आस्था और श्रद्धा के केंद्र की प्राण प्रतिष्ठा की है। यह एक बड़ी ऐतिहासिक घटना है। जैसा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- कालचक्र एक अलग गति में प्रवेश कर गया है, यह एक प्रारंभ है, हम सारे विश्व को राममय देखना चाहते हैं। राममय होने का अर्थ मनुष्यता के आधार पर रिश्तों और कर्तव्यों की दृढ़ता से है। व्यक्ति के सत्य के पक्ष में डटकर खड़े होने, उसकी करुणा और वीरता से है। भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा बड़ी अलौकिक और अद्भुत घटना है। भारत का हिंदू जागा, स्वर्ग के देवता जागे, दोनों का संगम हो गया और फिर 22 जनवरी को भगवान के आगमन का स्पंदन सबको हुआ। जो लोग मूर्ति और मूर्ति पूजा को नहीं मानते उनके प्राणों में भी स्पंदन हुआ है। उन्हें भी लगा कि प्रभु आ गए हैं।  



सवाल: आपके आंसुओं ने भगवान राम की साक्षात चरण धोए? 
जवाब :
भाग्य है, मेरी छोटी सी खुशी से रामजी, राम जन्मभूमि मुक्ति और हिंदू जागरण के लिए पीछे मुड़कर देखती हूं तो मन संतोष और तृप्ति से भरा है। जो ऊर्जा मुझे ईश्वर ने दी उसे समर्पित कर और संघर्षों से आग का दरिया पार कर यहां तक आए हैं। हमें उस क्षण को देखने का भी अवसर मिल गया, ये प्रभुराम की कृपा है। 

सवाल:  कुछ लोग मंदिर में अपना हिस्सा टटोल रहे हैं?  अपने-अपने दावे कर रहे हैं, अपने आप को वंशज बता रहे हैं, इसे कैसे देखती हैं? 
जवाब : मंदिर में खड़े होकर श्रेय नहीं बटोरना चाहिए, आशीर्वाद का पात्र बनना चाहिए। क्योंकि, अगर पात्रता नहीं होती तो कुछ प्राप्त नहीं होते है। यह 500 साल की साधना है और हम इसके साक्षी बने हैं। लेकिन, इसमें कितनी जिंदगी आहत हुई हैं, मीर बाकी ने 175000 हिंदुओं की हत्या कर राम मंदिर को ध्वस्त किया था। उसके बाद से भी बलिदानों की श्रृंखला लंबी है। नाम अयोध्या है, पर 500 साल से वह भूमि युद्ध भूमि ही बनी रही। वर्तमान पीढ़ी में हमारे कार सेवक, उनकी माता, पत्नियों और उनकी बहनों को इसका श्रेय जाता है। यह बात निश्चित है कि भाजपा ने इस आंदोलन को समर्थन दिया, इस बीच वह हारे और जीते भी, लेकिन उनके एजेंट में राम मंदिर हमेशा रहा। इसलिए उन्हें प्रसाद मिल रहा है, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र ने यह सौभाग्य और आशीष अर्जित कर लिया। यह सबका हो सकता था, कोई पहल कर सकता था। लेकिन, राजनीतिज्ञों ने हिंदुओं और उनकी परंपरा को गाली देकर राजनीति की। 

पीएम मोदी ने जन भावना को समझा और उसका पोषण किया, इसलिए उन पर इतने आशीर्वाद बरस रहे हैं। प्रभु श्रीराम जानते हैं, किसने कैसे मेरे आगमन की तैयारी की है। देश के लोग जानते हैं कि अगर, उस समय पट खोले गए तो किस लिए खोले गए। क्योंकि, शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया और इन लोगों (कांग्रेस) ने अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए उसे सदन में बदल दिया था। ऐसे में कहीं बहुसंख्यक नाराज न हो जाए, इसलिए ऐसा किया गया। ये तो वहीं बात है कि फिसल गए तो हर-हर गंगे...। प्रतिकूलता हो या अनुकूलता, एक लक्ष्य के साथ कौन चला यह जनता जानती है। हालांकि, मुझे लगता कि राम लाल ने अपना मुकदमा खुद लड़ा और आज वे भव्य राममंदिर में विराजमान हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

3 of 3
उमा भारती के साथ आंखों में आंसू भरे साध्वी ऋतंभरा। - फोटो : अमर उजाला
सवाल: भगवानराम सनातनियों को एक कर पाएंगे? 
जवाब: जब मंडल की लगाई आग देश में जल रही थी तब कमंडल लेकर साधु निकले थे। प्रभु राम श्रीमंतों के ही नहीं होते हैं, जो सोचते हैं मैं सोने का सिंहासन देकर खरीद लूंगा, राम नहीं बिकते। वे धन और दंगों के बीच नहीं बैठते, उन्हें शबरियों की कुटिया सुहाती है। भगवान राम निषादों के केवटों के प्राण हैं। किसी प्रदेश की भाषा भले ही अलग हो, वहां के भजनों में राम ही गूंजते हैं। राम वो तत्व हैं जो भारत ही नहीं पूरे विश्व को एक करने में समर्थ हैं। प्रभु राम यही चाहते हैं कि पूरा विश्व एक परिवार की तरह हो जाए।  

सवाल: ज्ञानवापी मामले पर सबकी नजर है, इस पर आप क्या कहेंगी? 
जवाब : वहां संघर्षों की जरूरत ही नहीं है, पत्थर स्वयं की गवाही दे रहे हैं। सच सबके सामने है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें