रवीना का परिजनों और गांव वालों ने किया सम्मान।
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रवीना बीमार मां के साथ-साथ अपने दो भाई-बहनों का भी ध्यान रखती है। वह भी सरकारी स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं उसकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि सभी एक झोपड़ीनुमा घर में रहते हैं। उनके पास इतने रुपये भी नहीं हैं जो बिजली कनेक्शन करा सकें। इस कारण घर में लाइट भी नहीं है। सुबह उठकर रवीना घर के सारे काम करती है, खाना-पीना बनाती है और फिर बकरियां चराने के लिए चली जाती है। शाम को वहां से वापस लौटने के बाद फिर घर के सारे काम करती है। इसके बाद रात में मोबाइल टॉर्च की रोशनी में बैठकर पढ़ाई करती है।