सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
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इस आयोजन ने आसपास के गांवों में भी चर्चा का माहौल बना दिया। लोग इसे परंपरा और आधुनिक जीवन के बीच के अनोखे संगम के रूप में देख रहे हैं। एक ओर जहां आज खेती-किसानी मौसम पूर्वानुमान और वैज्ञानिक तरीकों पर निर्भर है, वहीं ग्रामीण समाज अब भी आस्था और परंपराओं से जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यह आयोजन अंधविश्वास नहीं बल्कि सामूहिक भावनाओं और प्रकृति पर आधारित जीवन शैली का प्रतीक है।
महेंद्रगढ़ की यह अनोखी घटना सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गई। तस्वीरें और वीडियो देखकर लोग इसे मजाकिया अंदाज में भी ले रहे हैं, तो कुछ इसे ग्रामीण जीवन की सादगी और आस्था का प्रतीक बता रहे हैं। कई लोगों ने लिखा कि 'गधे गुलाब जामुन खा रहे हैं' कहावत को सच होते देखना अपने आप में अद्भुत है।